नुमाइश के आखिरी दिन प्रदर्शनी में उमड़ी लोगों की भारी भीड़।
- फोटो : amar ujala
पहले से ही ठेकेदार की मनमानी से आहत दुकानदार नुमाइश के आखिरी दिन उस समय भौचक्के रह गए, जब रविवार शाम करीब सवा छह बजे नुमाइश की बत्ती गुल हो गई। पहले ही दिनभर छाए बादलों और हल्की बूंदाबांदी से रोशनी कम थी। अचानक बिजली गुल हो जाने से अफरा तफरी मच गई।
परिवार समेत नुमाइश का आनंद लेने एवं खरीददारी के लिए आए लोग अचानक आई इस समस्या से तनाव में आ गए। उन्हें कम रोशनी में अपने परिवार के साथ वारदात की आशंका सताने लगी। इस चिंता में कई लोगों ने तो वापसी में ही भलाई समझी। उन्हें लौटता देख नुमाइश के पहले 10-12 दिन तक ग्राहकों को तरस रहे दुकानदारों के चेहरे फक्क पड़ गए। दुकानदारी ठंडी पड़ते देख कुछ दुकानदार तो इकट्ठे होकर नुमाइश गेस्ट हाउस पहुंच गए और ठेकेदार पर बिजली काटने का आरोप लगाने लगे।
उनका कहना था कि ठेकेदार पहले ही शाम छह बजे से रात बारह बजे तक बिजली देने के बजाय अंधेरा होने पर शाम सात बजे से रात साढ़े दस बजे तक बिजली दे रहा था। आखिरी दिन लाइट काटकर सारी दुकानदारी की आशाओं पर ठंडा पानी डाल दिया। बाद में पता चला कि बूंदाबांदी से महानगर में कई स्थानों पर इंन्सुलेटर बर्स्ट हो जाने की वजह से बिजली गुल हुई थी। करीब एक घंटे बाद बिजली आने पर सभी ने राहत की सांस ली।
सभी प्रमुख गेटों की लाइट पहले से ही थी गायब
नुमाइश के आखिरी दिन ठेकेदार की मनमानी के चलते मुजम्मिल गेट, मित्तल गेट समेत अन्य गेटों से बाजार तक की लाइट पहले से ही गायब थी। दुकानदारों ने बताया कि ठेकेदार ने यह लाइटें रविवार को जलवाई ही नहीं। ऊपर से साठगांठ के चलते दो दिन बढ़ी नुमाइश का पैसा अपने स्तर से वसूल रहा है। तमाम शिकायतों के बाद भी नुमाइश प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
नुमाइश में लगे कूड़े के ढेर
नुमाइश के आखिरी दिन नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने भी मुंह मोड़ लिया। उनके द्वारा सफाई न करने से समूचे नुमाइश परिसर में कूड़े व गंदगी के ढेर लगे रहे। इससे ग्राहक तो परेशान हुए ही, दुकानदार भी मायूस नजर आए।