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रोड साइकिलिंग में राजस्थान सबसे आगे

Tue, 08 Nov 2016 01:14 AM IST
अमर उजाला,अलीगढ़
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साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा नेशनल रोड साइकिलिंग प्रतियोगिता में रेस लगाते खिलाड़ी। - फोटो : amar Ujala
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21वीं रोड साइकिलिंग प्रतियोगिता के तीसरे दिन भी राजस्थान की टीम प्वाइंट्स टेबिल में सबसे आगे रही। हालांकि तीसरे दिन उसे मात्र एक कांस्य पदक मिला। कर्नाटक की टीम ने सोमवार को एक गोल्ड, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर दूसरा स्थान कायम रखा। व्यक्तिगत प्रदर्शन में मध्य प्रदेश की एन अनीता एवं रेलवे की टी विद्यालक्ष्मी देवी ने दो-दो गोल्ड जीतकर परचम लहराया। इधर, दिल्ली ने भी एक स्वर्ण, एक रजत एवं एक कांस्य जीतकर अपनी स्थिति में सुधार किया। जबकि उत्तर प्रदेश टीम की झोली तीसरे दिन भी खाली रही। 
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21वीं नेशनल रोड साइकिलिंग प्रतियोगिता के तीन वर्गों के विजेताओं को सोमवार को आयोजन समिति के चेयरमैन मुख्य विकास अधिकारी डीएस सचान, आरटीओ विक्रम सिंह एवं केनरा बैंक के प्रबंधक ने पदक बांटे।

 पदक पाने वालों में 40 किमी इंडिविजुअल टाइम ट्रायल मैन इलीट के स्वर्ण पदक विजेता कर्नाटक के नवीन जान, रजत पदक विजेता आरएसपीबी के अरविंद पनवर, सर्विसेज के मंजीत सिंह शामिल हैं।
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30 किमी इंडिविजुअल टाइम ट्रायल वीमैन इलीट में स्वर्ण पदक विजेता रेलवे की टी विद्यालक्ष्मी देवी, रजत पदक विजेता महाराष्ट्र की रुतूजा सतपुते व सीएफआई की समीरा अब्राहम को भी पदक दिए गए।

 20 किमी इंडिविजुअल टाइम ट्रायल सब जूनियर ब्वॉयज के स्वर्ण पदक विजेता कर्नाटक के वैकप्पा कैनगलगुट्टी, रजत पदक विजेता आसाम के दीपांता सेकिया तथा कांस्य पदक विजेता राजस्थान के राकेश ज्ञानी को भी पदक दिया गया।

इस मौके पर आयोजन समिति के सचिव कन्हैया गुर्जर, साइकिलिंग फेडरेशन के जनरल सेक्रेेटरी ओंकार सिंह, सचिव विनय सिंह, एसडीएम कोल पंकज वर्मा, यूपी साइकिलिंग एसोसिएशन के आरके गुप्ता, शमशाद निसार आजमी समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

मैं 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं। मेरे पिता रणवीर सिंह का देहांत हो गया था। घर में मां है। मुझे साइकिलिंग का बचपन से ही शौक था। मैने अपना कैरियर वर्ष 2006 में शुरू किया था, लेकिन सुविधाएं न मिलने एवं पैसे के अभाव को दूर करने के लिए वर्ष 2014 में रेलवे में नौकरी कर ली। अब मेरा अगला लक्ष्य ओलंपिक में पदक लाना है।
- टी विद्यालक्ष्मी, रेलवे 30 किमी इंडिविजुअल टाइम ट्रायल की स्वर्ण पदक विजेता

कर्नाटक के बागलकोट जिले के 15 वर्षीय वैकप्पा कैनगुट्टी पुत्र तैयप्पा ने फरवरी में केरला में हुई नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था। वर्ष 2015 में पुणे में भी उन्हें गोल्ड मिला था। उनका कहना है कि उनका साइकिलिंग में कैरियर बनाने का इरादा नहीं था, लेकिन उनके किसान पिता की प्रेरणा से वह इस फील्ड में आए और अब तक तीन गोल्ड मैडल जीत चुके हैं। इस बार फिर मुझे 20 इंडिविजुअल टाइम ट्रायल सब जूनियर ब्वॉयज स्पर्धा में गोल्ड मिला है।       - वैकप्पा कैनगुट्टी, कर्नाटक 20 किमी इंडिविजुअल टाइम ट्रायल स्वर्ण पदक विजेता 

बेंगलोर कर्नाटक के नवीन जान को भी उनके पिता जान थामस से प्रेरणा मिली है। मुझे फरवरी में केरला में हुई नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मिला था। वर्ष 2014 में नेशनल गेम्स में 14 किमी मैंस इलीट वर्ग में मुझे गोल्ड मिला था। देश में कम प्रतियोगिताएं होने एवं सुविधाओं के अभाव की समस्या से निपटने के लिए इस समय मैं आस्ट्रेलिया में प्रोफेशनल साइकिलिंग में हिस्सा ले रहा हूं। मेरा सपना इंडिया के लिए ओलंपिक में पहला गोल्ड लाना है।  
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- नवीन जान, कर्नाटक 40 किमी इंडिविजुअल टाइम ट्रायल मैन इलीट के स्वर्ण पदक विजेता

 
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