जड़ गांठ सूत्रकृमि (रूट-नॉट निमेटोड) मूंग की फसल के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इसके संक्रमण से फसल की पैदावार में 24 प्रतिशत तक कमी आ रही है। किसानों की इस समस्या के समाधान के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के वैज्ञानिकों ने शोध कर रोग की पहचान के साथ बचाव के प्रभावी उपाय भी सुझाए हैं।
शोध में मूंग की 18 किस्मों का परीक्षण किया गया। सभी किस्मों में संक्रमण का असर मिला, हालांकि इसकी तीव्रता अलग-अलग रही। अध्ययन के अनुसार संक्रमण से पौधों की लंबाई और वृद्धि में 22 से 28 प्रतिशत तक कमी आई, जबकि उपज 24 प्रतिशत तक घट गई। पौधों में फूल और फलियों की संख्या कम हुई तथा पत्तियां पीली पड़ने लगीं।
शोध के दौरान के-851, आईपीएम-02-14, एसएमएल-668, पंत मूंग-4 और पंत मूंग-5 किस्में सबसे अधिक प्रभावित पाई गईं। वहीं एमएल-5 किस्म पर संक्रमण का असर सबसे कम रहा। के-851 की जड़ों में सर्वाधिक 152 गांठें दर्ज की गईं, जबकि एमएल-5 में केवल 32 गांठें मिलीं।
वैज्ञानिकों के अनुसार संक्रमण से पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। पत्तियों में हरापन बनाए रखने वाले क्लोरोफिल की मात्रा 10 से 36 प्रतिशत तक कम हो गई।
शोधकर्ताओं का कहना है कि किसान अधिक संवेदनशील किस्मों के बजाय अपेक्षाकृत सहनशील किस्मों का चयन करें और समय पर निमेटोड नियंत्रण के उपाय अपनाएं तो फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। यह शोध प्रो. मुजीबुर रहमान खान के निर्देशन में शोधार्थी इरफान अहमद ने किया। शोध रिपोर्ट स्प्रिंग नेचर के जर्नल इंडियन फाइटोपैथोलॉजी में प्रकाशित हुई है।
शोध के फायदे
-किसानों को जानकारी मिलेगी कि मूंग की कौन-सी किस्में जड़ गांठ सूत्रकृमि के प्रति अधिक सहनशील हैं।
-सहनशील किस्मों का चयन कर उपज में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
-निमेटोड नियंत्रण की बेहतर रणनीति बनाने में वैज्ञानिकों और कृषि विभाग को मदद मिलेगी।
-भविष्य में रोग-प्रतिरोधी (निमेटोड-रोधी) मूंग की नई किस्मों के विकास का आधार तैयार होगा।
-उत्पादन से खाद्य सुरक्षा और दालों के उत्पादन में भी वृद्धि की संभावना बनेगी।
देश में उगाई जा रहीं मूंग की किस्में
-के-851 : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में उगाई जाती है।
-आईपीएम 02-14 : आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा के लिए उपयुक्त।
-एसएमएल- 668 : पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में होती है।
-पंत मूंग-4 : यूपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए अनुकूल है।
-पंत मूंग-5 : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में की जाती है।