प्रो.रब्बानी ने वैश्विक अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया कि हृदय रोग, वायु प्रदूषण और मौसम का सीधा संबंध है। यूरोपीय अध्ययनों में भी यह देखा गया है। पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों के जरिये सीधे खून में मिलकर सूजन पैदा करते हैं। पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा 12 से 38 फीसदी तक बढ़ जाता है। अत्यधिक वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के मात्र 24 घंटे के भीतर हृदय की धड़कन अनियंत्रित हो सकती है।
बचाव के लिए सलाह
- गर्म कपड़े-ठंडी हवाओं के संपर्क में न आएं, शरीर को ढक कर रखें।
- मॉनिटरिंग-ब्लड प्रेशर और हृदय की जांच नियमित अंतराल पर करवाएं।
- दवाएं-हृदय रोग की दवाओं के सेवन में बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें।
- मास्क-बाहर निकलते समय इसका उपयोग करें ताकि प्रदूषण से बच सकें।
- उपचार-छाती में भारीपन, दर्द या फ्लू जैसे लक्षण हों, तो चेकअप कराएं।