एएमयू सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक और इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे प्रो. सुहेल अयूब ने बताया कि यह निर्णय 2023 में उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की बैठक में लिया गया था, जिसमें एएमयू की ओर से उन्होंने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि बीएचयू और एएमयू में खोले जाने वाले ये केंद्र एक पूर्ण रिसर्च सेंटर की तरह कार्य करेंगे।
तीन प्रकार से होता है डाटा संग्रह
सैटेलाइट के माध्यम से वायु गुणवत्ता का डाटा सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए लिया जाता है। लिए गए फोटो के आधार पर वायु की गुणवत्ता का आंकलन किया जाता है। यह मोबाइल पर देखा जाता है। दूसरा तरीका सेंसर आधारित होता है। सेंटर 5 हजार रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक के हो सकते हैं। सड़क किनारे सेंसर लगा दिए जाएं और उससे हवा गुजरती है।तीसरा सबसे अधिक वैज्ञानिक और सटीक आंकलन विश्लेषण करके होता है। जिसके लिए रिसर्च लैब बनाई जा रही हैं।
15 अन्य शहरों में रीजनल सेंटर भी बनेंगे
प्रो. सुहेल अयूब कहते हैं कि अलीगढ़ और बनारस में रिसर्च सेंटर के अलावा मेरठ, इलाहाबाद, कानपुर, फिरोजाबाद, बिजनौर, आंबेडकर नगर, गोरखपुर, आगरा सहित 15 शहरों में रीजनल सेंटर भी बनाए जाएंगे। इनसे प्राप्त डाटा रिसर्च सेंटर तक पहुंचेगा।