श्रीकृष्ण भक्ति का प्रचार ही एकमात्र लक्ष्य : शेवलीकर
योगेश शेवलीकर ने बताया कि 18 वर्ष की आयु में ही उन्होंने संन्यास धारण कर लिया था। श्रीकृष्ण में उनकी अटूट भक्ति है। उनकी भक्ति का प्रचार-प्रसार करना ही एकमात्र लक्ष्य है। वह मराठी भाषा में लिखे ग्रंथ सूत्र पाठ पर शोध कर रहे हैं, जिसमें श्रीकृष्ण पर लिखे गए पद और गूढ़ (रहस्य) प्रमुख हैं।
भगवत गीता के प्रायश्चित विषय पर शोध कर रहीं माया
साध्वी माया ने बताया कि उन्होंने 17 वर्ष की आयु में संन्यास ले लिया था। वह श्रीमद् भागवत और गीता का उपदेश जन-जन तक पहुंचाना चाहती हैं। गीता के 11वें अध्याय के 41 और 42वें क्रमांक में शामिल प्रायश्चित विषय और भगवत गीता पर आधारित मराठी ग्रंथों पर उनका शोध जारी है, जिसके माध्यम से वह लोगों को बुरे कर्मों का पश्चाताप कैसे करें और सत्कर्म के बारे में जागरूक करती हैं।
एएमयू से कृष्ण भक्ति का संदेश देना चाहते हैं
भाई-बहनों ने बताया कि एएमयू के बारे में कई बार विवादित खबरें पढ़ने को मिलीं। इस विवि को केवल मुस्लिमों से जोड़कर देखना गलत है। एएमयू में पढ़ने के पीछे की वजह समाज को एकता और श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश देना है। उन्होंने यह भी बताया कि 2022 में अलीगढ़ आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में वेशभूषा देखकर कई बार उन्हें पुस्तकालय जाने से भी रोका गया लेकिन शिक्षकों और साथियों का सहयोग मिला जिससे उन्हें कहीं भी आने-जाने में सहूलियत हुई। शुरुआत में कुछ महीने एसएस नॉर्थ हॉस्टल में रहे थे। यहां वेज और नॉनवेज खाना एक ही जगह बनता है, बर्तन भी एक ही थे। संध्या वंदन भी नहीं कर पाते थे, इसलिए अब शहर में एक श्रीकृष्ण भक्त के यहां रह रहे हैं।