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नगर विकास विभाग सचिव ने कोरोना रोकथाम की खामियों की रिपोर्ट शासन को भेजी

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पिछले दिनों यहां कोविड 19 की रोकथाम के लिए चल रहे प्रयासों की समीक्षा करने आये नगर विकास विभाग के सचिव अनुराग यादव को साफ सफाई, सैनिटाइजेशन, पेयजल से लेकर अन्य खामियां मिली थीं। विशेष रूप से उन्होंने पानी की टंकियों में किए जाने वाले क्लोरीनेशन में मानकों का पालन नहीं होने, डंपिंग यार्ड चिन्हित न होने व निकायों में पल्स ऑक्सीमीटर एवं इंफ्रारेड थर्मामीटरों की कमी पर नाराजगी जताई थी। इसकी रिपोर्ट उन्होंने शासन को सौंप दी है।
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उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिले के निकायों में जल निकासी की समस्या आम है। शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बेहद लचर है। नाले नालियां सिल्ट और कीचड़ से अटे पड़े हैं। पालीथिन कैरी बैग व प्लास्टिक और थर्माकोल के उत्पादों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। यहां तक कि पेयजल के क्लोरीनेशन के प्रोटोकाल की जानकारी तक संबंधित कर्मचारियों को नहीं है। डंपिंग ग्राउंड चिन्हित न होने के कारण कूड़े का निस्तारण सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
खाली पड़े प्लाटों में कूड़े कचरे के ढेर लगे हैं। कई कार्यालयों में न तो मास्क का प्रयोग हो रहा है और न ही कोविड हेल्प डेस्क स्थापित हैं। निकायों के पास पल्स आक्सीमीटर एवं इन्फ्रारेड थर्मामीटर भी नहीं हैं। निकायों के पास सफाई, फागिंग, एंटी लार्वा स्प्रे व सैनिटाइजेशन के लिये उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। इस रिपोर्ट पर मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त किए जाने के निर्देश दिए हैं।
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गौर हो कि कोरोना काल में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए लगातार शासन स्तर से आईएएस अधिकारियों की तैनाती कर निगरानी कराई जा रही है। सभी आईएएस मंडलायुक्त को अपनी रिपोर्ट देकर शासन में उसे प्रेषित कर रहे हैं। अनुराग यादव की रिपोर्ट भी इसी क्रम में हैै। परंतु इनके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं दिख रहा है।
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