इस पर नगर आयुक्त ने इसे अपना दायित्व बताया और घटनाक्रम का जिक्र करते हुए एफआईआर वाली बात बताई तो अज्जू ने उग्र होकर कहा कि तुम क्या लोर्ड हो, तुम कौन हो, हो क्या तुम, वह फल व ठेली वहीं लगेंगी और आपके द्वारा कराई गई एफआईआर भी निरस्त करानी पड़ेगी। वरना इसका अंजाम बुरा होगा। यह कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। तहरीर के अनुसार उस समय एसएनए वीर सिंह सहित नगर निगम के तमाम अधिकारी व कर्मचारी वहां मौजूद थे। जिनके द्वारा उन्हें रोका गया। वरना आपा खोकर वे नगर आयुक्त व नगर निगम कर्मचारियों पर हमला कर देते।
इसके बाद अज्जू ने मीडिया व सोशल मीडिया पर यह भी बयान दिया कि अब आगे देखूंगा कि कैसे अतिक्रमण हटाते हैं। जहां भी जाएंगे वहां विरोध करूंगा। चेन से काम नहीं करने दूंगा। इससे नगर निगम में भय का माहौल है। इसी मामले में 26 फरवरी को पहुंची तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
जनता के लिए चाहे केस दर्ज हो या अन्य कोई कार्रवाई हो। हम जनता के साथ खड़े थे, खड़े हैं और खड़े रहेंगे। इस तरह की कार्रवाई से हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। गलत बात का हमेशा विरोध किया है और करते रहेंगे। इस विषय को पार्टी हाईकमान से भी अवगत कराया गया है।-अज्जू इश्हाक, सपा नेता
हमने कोई गलत बात नहीं रखी। हम जनता की आवाज लेकर गए थे। अगले दिन भाजपाई भी गए थे। उन पर भी तो केस दर्ज कराया जाना चाहिए। हम इस मामले में जेल जाने तक को तैयार हैं।-आगा यूनुस, कांग्रेस नेता
हमने जनता की आवाज उठाई थी। आगे भी उठाते रहेंगे। इसलिए ऐसे मामलों में पीछे हटने का मतलब नहीं है। नगर निगम चाहे एफआईआर कराए या अन्य कार्रवाई करे।-प्रशांत वाल्मीकि, सपा नेता
मंगलवार को नगर निगम में हुए घटनाक्रम में सपा नेता अज्जू, उनके साथ आगा यूनुस व प्रशांत वाल्मीकि को नामजद व अज्ञात को आरोपी बनाकर नगर निगम की ओर से तहरीर मिली थी। जिस पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। बाकी जांच व साक्ष्य के आधार पर आगे नियमानुसार गिरफ्तारी आदि कार्रवाई तय होगी।-मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटी
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर संग घटना में ये धाराएं
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार इस मामले में तहरीर के आधार पर तीनों नामजद व उनके सैकड़ों अज्ञात साथियों पर विभागीय कार्य में बाधा डालने, शासकीय योजना में व्यवधान डालने, गाली देते हुए जान से मारने की कोशिश करने की धमकी देने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, सुविधाओं को प्रदान करने में बाधा डालने व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी से गाली-बदतमीजी व बदसलूकी करने व वीडियो वायरल करने संबंधी आरोप हैं। जिसमें दंगा भड़काने, गैर कानूनी भाषण देने, लोक सेवक को कार्य से रोकने, चोट पहुंचाने का प्रयास, अवैध रूप से रोकना, चोट पहुंचाने के लिए हमले का इरादा, गाली, धमकी आदि दस धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पुलिस कानूनी बारीकियों पर करेगी कार्रवाई
आईएएस अधिकारी संग हुई इस घटना में पुलिस प्रशासनिक लॉबी के प्रतिरोध के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जिसमें दस में से दो धाराएं ऐसी हैं, जिनमें नामजद को जेल भेजा जा सकता है या न हीं। इनमें 7 वर्ष तक की सजा वाली चोट पहुंचाने व हमले के इरादे से रोकने संबंधी धारा व सरकारी कार्य में बाधा संबंधी धारा शामिल है। वहीं पुलिस अब इस मामले में साक्ष्य संकलन के साथ-साथ कानूनी बारीकियां समझने व अधिकारियों से राय लेने के बाद ही कोई कदम उठाएगी। इस संबंध में घटना वाले दिन के सभी वीडियो फुटेज संकलित किए जा रहे हैं। जिसमें विधिक राय भी ली जाएगी।
अर्से बाद हुआ ऐसा घटनाक्रम
अपने जिले में इस तरह किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी संग विवाद के घटनाक्रम पूर्व में भी हुए हैं। जिनमें कांग्रेस नेता श्यौराज जीवन का एडीएम आपूर्ति से विवाद, इगलास के पूर्व विधायक मुकुल उपाध्याय का बसपा शासनकाल में सीडीओ से विवाद, भाजपा शासन में पूर्व विधायक संजीव राजा का तत्कालीन नगर आयुक्त से विवाद खासा चर्चाओं में रहा था।
सोशल मीडिया पर भाजपाई खेमे में खुशी
इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया में भाजपाई खेमे में खासी खुशी देखने को मिली। तरह तरह की प्रतिक्रिया इस मामले में सोशल मीडिया पर दी जाती रही।