महानगर के दुबे पड़ाव इलाके के नर्सिंग होम में लिंग परीक्षण को लेकर हुई छापेमारी के दौरान पकड़े गए एक डॉक्टर व दलाल महिला की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेशी पर पुलिस की फजीहत हो गई। अदालत ने यह कहते हुए दोनों का रिमांड अस्वीकार कर दिया कि इन दोनों का इस मुकदमे में क्या दोष? असली दोषी तो डॉक्टर एके वार्ष्णेय हैं, उन्हें गिरफ्तार करके लाओ। इसके बाद पुलिस दोनों को लेकर घंटों कोर्ट के बाहर बैठी रही। बाद में अधिकारियों से विमर्श के बाद इन दोनों को थाने लाकर थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया गया।
नियम के अनुसार किसी मुकदमे में गिरफ्तार आरोपी को पुलिस कोर्ट में पेश करती है। जहां अदालत आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर उसका रिमांड मंजूर करते हुए जेल भेजती है। इसी नियम के तहत गांधीपार्क पुलिस ने शुक्रवार को दुबे पड़ाव के नर्सिंग होम से गिरफ्तार डॉ.गजेंद्र सिंह निवासी खैर रोड, द्रोपदी निवासी फरीदाबाद को गिरफ्तार किया। इन दोनों पर माध्यम बनकर गर्भवती महिला को डॉ.एके वार्ष्णेय के नर्सिंग होम तक लिंग परीक्षण के लिए पहुंचाने का आरोप था।
इन दोनों को मौके से ही गिरफ्तार किया गया था। पुलिस जब शनिवार दुपहर दोनों को रिमांड पर पेश करने पहुंची तो अदालत ने दोनों का रिमांड अस्वीकार कर दिया। सीधा-सीधा कहना था कि इन पर पीएनडीटी एक्ट नहीं बनता। असली आरोपी तो डॉ.एके वार्ष्णेय हैं। उन्हें लेकर आओ। इसके बाद दोनों को लेकर पुलिस कोर्ट के बाहर देर शाम तक बैठी रही। बाद में वापस थाने लाया गया। चूंकि मुकदमे में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। इसलिए दोनों को थाने से जमानत दे दी गई। एसओ ने थाने से जमानत की पुष्टि की है और बताया है कि मुख्य आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।