एक-एक आयोजन पर पारंगत आयोजनों या इवेंट ग्रुपों के अलावा तमाम सियासी लोग भी अपना प्रयास कर रहे हैं। इसके पीछे की वजह है कि नुमाइश प्रशासन की ओर से आयोजकों को मंच सहित सभी व्यवस्थाएं व अनुदान भी मिलता है।
अलीगढ़ नुमाइश में ठेकों के बाद अब आयोजनों को लेकर सियासी सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है। इसमें वे आयोजक तो शामिल हैं हीं जो आयोजन कराने में पारंगत हैं। इसके अलावा वे सियासी लोग भी सक्रिय हैं जो आयोजन कराने के बहाने खुद की पकड़ का अहसास कराना चाहते हैं।
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नुमाइश को लेकर हमेशा से यह कहा जाता रहा है कि इसमें सियासी दखल प्रशासन पर हावी रहता है। इसकी शुरुआत नुमाइश के ठेकों से शुरू होती है। तहबाजारी ठेका जरूर ऐसा है, जिसमें किसी ग्रुप की एंट्री नहीं हो पाती। इसके अलावा अन्य ठेकों में सियासी सिफारिश से ग्रुप बदलते रहते हैं। इस बार भी कुछ ठेकों को लेकर ऐसा ही हुआ। ठेका प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब नुमाइश में होने वाले मंचीय कार्यक्रमों को लेकर सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है, जिसमें बॉलीवुड नाइट से लेकर गीत-संगीत से जुड़े अन्य मंचीय कार्यक्रमों को लेकर ज्यादा सिफारिशें हैं।
एक-एक आयोजन पर पारंगत आयोजनों या इवेंट ग्रुपों के अलावा तमाम सियासी लोग भी अपना प्रयास कर रहे हैं। इसके पीछे की वजह है कि नुमाइश प्रशासन की ओर से आयोजकों को मंच सहित सभी व्यवस्थाएं व अनुदान भी मिलता है। इसी के चलते विभिन्न संगठन, सियासी लोग माननीयों की परिक्रमा में जुटे हैं। कुछ की सिफारिश माननीयों से हैं तो कुछ की जिले के तमाम रसूखदारों से है। वे अपने अपने प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह आयोजन उन्हें मिल जाए।