एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सलमान इम्तियाज ने कहा कि मुस्लिमों सहित आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के शैक्षिक उन्नयन के लिए सर सैयद अहमद ने इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। कुछ संस्थाएं इसलिए स्थापित की जाती हैं, ताकि पिछड़े वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और देश के निर्माण में योगदान दे सकें। संविधान ने सभी धर्मों को शैक्षिक संस्थाएं खोलने की अनुमति दी है, ताकि वह शिक्षा में आगे बढ़ सकें।
एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय के पूर्व प्रभारी प्रो. आरपी सिंह ने कहा कि फिलहाल एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है। इसके बाद कुछ आगे और फैसला आता है तो आरक्षण होगा या नहीं, यह तय होगा। एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय के प्रभारी प्रो. आसिम सिद्दीकी ने कहा कि एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ ने 1967 में अजीज बाशा के मामले में दिए गए सुप्रीमकोर्ट की पांच जजों की बेंच के फैसले को पलट दिया। इसलिए अब यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार है। आगे भी बरकरार रखने की पूरी कवायद होगी। हालांकि, अंतिम निर्णय गठित तीन जजों की बेंच को करना होगा।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आरक्षण के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का एएमयू के पूर्व मीडिया सलाहकार डॉ. जसीम मोहम्मद ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि एएमयू को यूजीसी के नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशों पर काम करना चाहिए।
डॉ. जसीम मोहम्मद ने कहा कि एएमयू प्रशासन को अपने प्राथमिक लक्ष्य के रूप में अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि शैक्षणिक गुणवत्ता एएमयू के मिशन के केंद्र में होनी चाहिए। डॉ. जसीम ने कहा कि इन सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर एएमयू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर अपनी विरासत और प्रतिष्ठा को मजबूत कर सकता है।