हाथरस के रसगवां के डीएल पब्लिक स्कूल के छात्रावास में स्कूल में छुुट्टी होने के लिए कक्षा आठ के छात्र ने कक्षा दो के छात्र की गला दबाकर की हत्या की थी। यह आरोपी के कबूलनामे में खुलासा हुआ है। इस घटना से मनोचिकित्सक से लेकर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े शिक्षकों ने भी हैरत जताई है। वह कहते हैं कि यह अविश्वसनीय और अकल्पनीय सामाजिक घटनाक्रम है, जो मानसिक रूप से झकझोर कर रख देती है।
- यह दुखद घटना यह दिखाती है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं के प्रबंधन पर ध्यान देना कितना महत्वपूर्ण है। स्कूलों को मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा, संघर्ष समाधान कौशल और काउंसिलिंग सेवाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।-डॉ. मंजू सिंह, मनोवैज्ञानिक, डीएस कॉलेज
- बच्चों में जिस तरह हिंसात्मक प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, उसमें कहीं न कहीं सोशल मीडिया की अहम भूमिका है। माता-पिता और बच्चों के बीच अब कोई संस्कारिक बातचीत तो होती नहीं है। अभिभावक भी बस ज्यादा कमाओ, पैसा और जमीन जायदाद की ही बातें करते हैं।-डॉ. अंशु सोम, मनोचिकित्सक
- बच्चों के इस तरह के संस्कार और उनके व्यवहार में आक्रोश, आक्रामकता, हिंसा, क्रोध आदि की बढ़ती हुई प्रवृत्ति का कारण उनका उनसे छिनता हुआ बचपन और असंतुलित कुंठित परवरिश और परिवेश को माना जा सकता है।-प्रो. शंभुनाथ तिवारी, प्राध्यापक, हिंदी विभाग, एएमयू
- बच्चों में संस्कारों की कमी है। उनमें न कोई डर और न कोई भय है। सीनियर ने जूनियर की जिस तरह गला दबाकर हत्या की है, वह अचंभित करने वाली है। हालांकि, इसके लिए एकल परिवार संस्कृति, सिनेमा व इंटरनेट भी कुछ हद तक जिम्मेदार हैं।-डॉ. मोहित सक्सेना, प्राध्यापक, डीएस कॉलेज
- बच्चे की मनाेस्थिति को समझने की जरूरत है। हालांकि जिस तरह छात्र ने घटना को अंजाम दिया है, उससे यह अंदाजा लग रहा है कि उसका रोमांचक की तरफ रुझान था। वह पढ़ाई में कमजोर था, इसलिए आपराधिक प्रवृत्ति का हो रहा था।-डॉ. पूनम बत्रा, मनोवैज्ञानिक व सलाहकार
- बच्चों में हिंसात्मक प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह अब बच्चों में संस्कार देने का काम शून्य हो गया है। अभिभावक भौतिकवाद हो रहे हैं, वह अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर बनाना चाहते हैं, जबकि उन्हें नागरिक बनाने की दिशा में सार्थक कदम होना चाहिए।-अजय बिसारिया प्राध्यापक, हिंदी विभाग, एएमयू