रामलीला मैदान से रावण पुतला दहन से ऐन पहले रावण का पुतला किसी और ने नहीं, बल्कि खुद रामलीला गौशाला कमेटी अध्यक्ष ने ही हटवाया था। यह बात खुद उन्होंने स्वीकार ली है। हालांकि, वह दलील दे रहे हैं कि पुलिस के डर से उन्होंने ऐसा किया। मगर लोग उनकी इस दलील को मानने को तैयार नहीं। तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। खुद कमेटी में भी मतभेद दिखाई दे रहे हैं। अंदरखाने की बातों पर गौर करें तो यह सब कमेटी में चल रही खींचतान का एक हिस्सा है। इसके चलते सालाना और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में जनभावनाओं से खिलवाड़ हुआ है। आरोपों में घिरी थाना पुलिस कह रही है कि कोई जांच करा लो और सीसीटीवी चेक करा लो, हमारा कोई व्यक्ति पुतला हटवाने की कहने रामलीला मैदान नहीं गया। हां, पूरे विवाद को लेकर पुलिस एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर रही है, जो मंगलवार को अधिकारियों तक पहुंचने की उम्मीद है।
मैं क्या करता, मैं मजबूर था : वेदप्रकाश जैन
रामलीला गौशाला कमेटी के अध्यक्ष वेदप्रकाश जैन का कहना है कि रात 9 बजे मंत्री के पास एक नोटिस आया है, जिसकी सूचना मुझे मंत्री ने दी। इसके बाद रात 3 बजे महिला चौकीदार राधारानी अग्रवाल उर्फ चांदनी का फोन आया कि लैपर्डकर्मी आए हैं और पुतला हटाने की कह रहे हैं। ऐसे में मैंने मंत्री अरविंद अग्रवाल को फोन किया। जिस पर उन्होंने कहा कि जैसा आप उचित समझें। तब मैंने चांदनी को फोन कर कारीगर से पुतला ले जाने के लिए कह दिया था। सुबह 7 बजे मंत्री को बता दिया था। इसके बाद दोपहर में विधायक संजीव राजा का फोन आता है कि आप मैदान में आइए। वहां पहुंचा तो वह एकदम बरस पड़े। उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। यहां यह बात गलत उठ रही थी कि पुतला गायब कराया है या चोरी कराया है, क्योंकि सभी ने रावण के पुतले का धड़ मैदान के पीछे बाग में देख लिया था। बाद में पुलिस ने महिला चौकीदार को शांति भंग में गिरफ्तार कर लिया। मुझे भी थाने में बैठाए रखा। ऐसे में मैं क्या करता। मैं मजबूर था। हां, सिर्फ मंत्री ने मेरा समर्थन किया था। बाकी किसी ने नहीं।
अगर डर लगता है तो अध्यक्ष क्यों बने : विमल अग्रवाल
रामलीला गौशाला कमेटी के उपाध्यक्ष विमल अग्रवाल कहते हैं कि पुतला वेद प्रकाश जैन ने चांदनी के माध्यम से गायब करवाया था। क्यों गायब करवाया, इसका जवाब वही देंगे। जब हमारे पास 28 तारीख तक आयोजन की एडीएम सिटी के यहां से अनुमति है। अनुमति थाने में भेजी गई। हां, नोटिस गलत तरीके से दिया गया। लेकिन जब तय हो गया था कि रावण के पुतले का दहन मैदान में ही होगा तो वेद प्रकाश जैन ने क्यों पुतला गायब करा दिया। अगर डर लगता है तो अध्यक्ष पद क्यों संभाले हुए हैं। रविवार सुबह सात बजे पता चला कि रावण का पुतला हट गया है तो कमेटी के लोगों को बुलाया। यहां से वेद प्रकाश जैन को फोन किया। पुतला हटवाया है तो इसीलिए बात करनी हैं। उन्होंने आने से मना कर दिया। राधारानी उर्फ चांदनी को बुलाया। मान-मनौव्वल के बाद चांदनी आई। उसने बताया कि पुलिसकर्मी आए थे। बाबूजी को फोन किया तो हटवा दिया गया। इसके बाद शहर विधायक से बात की। शहर विधायक आने पर पुतला दहन हुआ। सीधे-सीधे कमेटी को बदनाम करने की साजिश रची गई थी। जो दोषी हो, उस पर कार्रवाई की जाए।
रात में नोटिस मिलने के बाद सुबह पुतला हटाने की जानकारी मुझे मिल गई थी। दोपहर में मानव महाजन तथा अन्य लोगों के साथ चर्चा हुई कि छोटे रूप में ही सही, रावण का पुतला दहन करेंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई। इसी बीच हंगामे के चलते तहरीर पर कार्रवाई भी हो गई। जबकि पूरी गलती गांधीपार्क इंस्पेक्टर व चौकी इंचार्ज की है। वह मानने को तैयार नहीं थे कि रावण पुतला दहन की अनुमति प्रशासन ने दी दी है, जबकि एसीएम अंजुम बी ने कहा था कि अनुमति हो गई है। ऐसे में हमारी क्या गलती है। वहीं, रात को पुलिस आई तो अध्यक्ष ने पुतला हटवा दिया।
- अरविंद अग्रवाल मंत्री रामलीला गौशाला कमेटी
- रावण पुतला दहन की तैयारी के समय प्रशासन ने अनुमति दे दी थी। एक दिन पूर्व पुलिस की एंट्री होती है। भाजपा नेता के हस्तक्षेप के बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है तो पुलिस रात को तीन बजे फिर से क्यों पहुंची। वेद प्रकाश जैन के अनुसार, पुलिस डरा रही थी कि पुतला हटा लो। पुतला हटा दिया गया। इसके बाद गायब होने की भ्रामक खबर फैलाई जाती है। हस्तक्षेप पर पुलिस पुतला ढूंढकर लाती है और दहन होता है। ऐसे में रावण का पुतला गायब होनी की खबर उपहास है। इसकी जांच होनी चाहिए। सबसे पहले नोटिस देने वाली पुलिस, रात में पहुंचने वाली पुलिस और गांधीपार्क पुलिस की भूमिका की जांच होनी चाहिए। सब कुछ सामने आ जाएगा। - मानव महाजन सह संयोजक श्री रामलीला महोत्सव समिति
- हमने नोटिस सिर्फ इसलिए दिया था कि यहां पहली बार रावण पुतला दहन हो रहा है तो कमेटी कम से कम ये बताए कि कितना बड़ा आयोजन होगा। कितनी भीड़ जमा हो सकती है। कितने एरिया में क्या-क्या सुरक्षा इंतजाम करने हैं। बाकी पुलिसकर्मियों के जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वे निराधार हैं। किसी भी स्तर पर जांच करा ली जाए और सीसीटीवी दिखवा लिए जाएं।- मणि कांत शर्मा, इंस्पेक्टर गांधीपार्क
- पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति से ही रावण का पुतला दहन तय हुआ था। अब इनके बीच क्या विवाद है। यह जांच का विषय है। विवाद के बाद जो कुछ हुआ है, उस पर पुलिस अपने स्तर से कार्रवाई कर रही है। -अंजुम बी एसीएम प्रथम