ऋषभ जन्म के बाद से सांस लेने में दिक्कत महसूस करता था। रोते समय उसका चेहरा नीला पड़ जाता था। खून की उल्टियां होने लगीं, जिससे माता-पिता परेशान हो गए। माता-पिता बच्चे को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज में आ गए।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज की कार्डियोथोरेसिक सर्जरी टीम ने छह वर्षीय ऋषभ के दिल का दुर्लभ ऑपरेशन करने में कामयाबी हासिल की है। ऑपरेशन के दौरान 50 मिनट तक उसके दिल और फेफड़े को कृत्रिम पंपिंग से चलाया गया। मासूम का दिल दाहिने तरफ है।
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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर का छह वर्षीय ऋषभ जन्म के बाद से सांस लेने में दिक्कत महसूस करता था। रोते समय उसका चेहरा नीला पड़ जाता था। खून की उल्टियां होने लगीं, जिससे माता-पिता परेशान हो गए। उसकी जांच की गई तो डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल में दिखाने के लिए कहा। जांच में ‘टेट्रालॉजी ऑफ फेलोट’ और हार्ट फेल्योर पाया गया, जो गंभीर जन्मजात हृदय दोष है। इलाज केवल ऑपरेशन बताया गया। माता-पिता बच्चे को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज में आ गए।
उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शाद अबकरी से परामर्श लिया, जिन्होंने उसे कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में भेजा। इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सैयद शमायल रब्बानी की अगुवाई में डॉ. मोहम्मद आजम हसीन और डॉ. आमिर मोहम्मद ने दुर्लभ ऑपरेशन किया। डॉ. सबीर अली खान और इरशाद शेख ने हृदय-फेफड़े के कार्यों का प्रबंधन किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. दीप्ति चानना, डॉ. निदा और डॉ. इमामुद्दीन रहे।
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सात वर्षों में हो चुका है 1000 जन्मजात हृदय रोगियों का इलाज
डॉ. शमायल रब्बानी ने कहा कि इस बच्चे में हॉफमैन का प्रकार टेट्रालॉजी ऑफ फेलोट था, जिससे यह प्रक्रिया उच्च जोखिम वाली बन गई। डॉ. आमिर मोहम्मद ने बताया कि विभाग में पिछले सात वर्षों में लगभग एक हजार जन्मजात हृदय दोष मामलों का सफल इलाज हो चुका है। डीईआईसी जेएनएमसी के संयोजक प्रो. कामरान अफजल ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बच्चों के लिए जीवन रक्षक सर्जरी मुफ्त में उपलब्ध कराई। कुलपति प्रो. नईमा खातून ने कहा कि कई वर्षों में 2,500 से अधिक कार्डियक सर्जरी हो चुकीं हैं।