फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी जमानत पर रिहा

विज्ञापन
विज्ञापन
बरला क्षेत्र के दो साल पुराने नाबालिग बच्ची संग दुष्कर्म और गर्भवती होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। नाबालिग ने जिस बच्चे को जन्म दिया था, उसका डीएनए दुष्कर्म के आरोप में जेल भेजे गए आरोपी युवक से नहीं मिला है। राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला से यह रिपोर्ट (निगेटिव) आने के बाद न्यायालय ने आरोपी को होली से ऐन पहले जमानत पर रिहा कर दिया। जब आरोपी गांव पहुंचा तो गांव में भूचाल आ गया और पूरे प्रकरण से पर्दा हटा। अब पीड़ित किशोरी का परिवार आरोपी पक्ष पर रिपोर्ट बदलवाने का आरोप लगा रहा है।
विज्ञापन

ये है प्रकरण
वाकया फरवरी 2019 का है। जब गांव की आठवीं में पढ़ने वाली 13 वर्षीय बच्ची के किसान परिवार को पता चला कि उनकी बेटी पांच माह की गर्भवती है। तीन बेटों के बीच इकलौती बेटी से जब इसे लेकर पूछा गया तो उसने गांव के ही 28 वर्षीय अमित नाम के युवक पर यह आरोप मढ़ा कि जब वह घर पर अकेली होती थी, तभी आरोपी उसके साथ काफी समय से डरा धमकाकर दुष्कर्म करता आ रहा है। किसी से शिकायत करने पर परिवार को जान से मारने की धमकी देता था। मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाया और बरला थाने में अमित के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा गया। न्यायालय में चार्जशीट भी दायर कर दी गई और न्यायालय में सत्र परीक्षण भी शुरू हो गया।
बच्चा पैदा होने पर कराया डीएनए
कुछ माह बाद किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद न्यायालय में जब उससे पूछा गया तो वहां भी उसने अमित पर ही इस कृत्य का दोष मढ़ा। वहीं अमित पक्ष ने इस आरोप को दावे के साथ सिरे से खारिज किया और डीएनए कराने का अनुरोध अमित पक्ष ने ही न्यायालय से किया। बाद में न्यायालय के आदेश पर किशोरी द्वारा जन्मे गए बच्चे व अमित के डीएनए का सैंपल लॉकडाउन काल में वर्ष 2020 में कराया गया और उसे राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ मिलान के लिए भेजा गया। अब फरवरी माह में उसकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई है।
विज्ञापन

जमानत पर आया युवक, पीड़ित ने नहीं मनाई होली
इस मामले में रिपोर्ट के आधार पर आरोपी पक्ष ने न्यायालय में जमानत अर्जी दायर की, जिसे सत्र न्यायालय ने होली से ऐन पहले मंजूर करते हुए अमित को जमानत दे दी। होली से दो दिन पहले अमित अपने गांव पहुंच गया और उसको देखकर पीड़ित परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित ने पुलिस और अपने पैरोकारों से संपर्क किया तो पता चला कि डीएनए रिपोर्ट निगेटिव आने के आधार पर उसे जमानत मिली है। इसके बाद से पीड़ित परिवार घर में कैद होकर रह गया है। उसने होली तक नहीं मनाई और न किसी से मुलाकात की है।
रिपोर्ट बदलवाने का आरोप, मिल रहीं धमकी
इस विषय में मोबाइल पर अमर उजाला से बातचीत में किशोरी के पिता ने बताया कि पुलिस से उन्हें यह जानकारी मिली है कि आरोपी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। मगर हमें भरोसा नहीं है। जरूर आरोपी पक्ष ने साठगांठ कर रिपोर्ट बदलवाई है। वहीं उन्होंने बताया कि बच्चा व बेटी आज भी हमारे पास ही रहते हैं। हम ही उसका पालन पोषण कर रहे हैं। अब हम किसी से क्या कह सकते हैं। कहां मदद मांगने जा सकते हैं, कहां हमें न्याय मिलेगा। समझ नहीं आ रहा। उल्टा हमें धमकियां भी मिलने लगी हैं कि जेल भिजवाने का परिणाम भुगतना पड़ेगा। इसी डर से हमने होली नहीं मनाई है।
- दो साल पुराने इस प्रकरण में न्यायालय ने हमें डीएनए रिपोर्ट मंगाने के निर्देश दिए थे। फरवरी माह के अंत में यह रिपोर्ट प्राप्त हुई, जो निगेटिव आई थी। जिसमें स्पष्ट था कि आरोपी का यह बच्चा नहीं है। रिपोर्ट न्यायालय में दे दी गई थी। अब पूरे प्रकरण पर नजर रखी जा रही है। जो न्यायालय का निर्देश होगा, वह किया जाएगा।
- सुमन कनौजिया, सीओ बरला
- पीड़ित बच्ची ने मुकदमे में ट्रायल के दौरान जेल गए आरोपी पर ही इस कृत्य का दोष मढ़ा था, जबकि बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि वह आरोपी नहीं है। इसी के चलते न्यायालय के निर्देश पर यह परीक्षण कराया गया था। अब रिपोर्ट निगेटिव आई है और आरोपी को जमानत मिलने की जानकारी मिली है।
विज्ञापन

-प्रताप सिंह राघव, पीड़ित के अधिवक्ता
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें