राम नवमी पर कन्या-लांगुरा जिमातीं भक्त
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चैत्र नवरात्र के आखिरी दिन 17 अप्रैल को हाथरस में रामनवमी का त्योहार श्रद्धापूर्वक मनाया गया। घर-घर में भक्तों ने पूजा-अर्चना के बाद कन्या-लांगुरा जिमाए। मंदिरों में सुबह से लेकर आधी रात तक श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा। जगह-जगह शिविर लगाकर चना-हलवा, पूड़ी-सब्जी और खीर का प्रसाद वितरित किया गया। पूरा शहर देवी के जयकारों से गूंजता रहा।
रामनवमी के मौके पर हाथरस में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह भक्तों ने घरों में अज्ञारी की गई और उसके बाद भक्तों ने नजदीकी मंदिरों में जाकर देवी की प्रतिमाओं का जलाभिषेक किया। घरों में कन्या-लांगुरा जिमाए गए। गली-मोहल्लों में कन्या-लांगुरा रूपी बच्चों की टोलियां बुलावे के इंतजार में घूमती नजर आईं। जिस घर से बुलावा आता, वहां बच्चों का जमघट लग जाता। भक्तों ने मंदिरों में जाकर चना-हलवा और पूड़ी से देवी का भोग लगाया और प्रसाद वितरित किया। शहर के किला गेट स्थित हाथुरसी देवी, पथवारी मंदिर, बौहरे वाली देवी, शीतला माता मंदिर, मसानी माता का मंदिर, रमनपुर स्थित चामुंडा मंदिर, चामड़ गेट स्थित चामुंडा मंदिर, बिसाना स्थित तारागढ़ देवी, अलीगढ़ मार्ग स्थित कंकाली मंदिर, सहपऊ स्थित भद्रकाली और मां कादिराबाद वाली, कुरसंडा में अटाकी माता, मुरसान में पीपल वाली माता आदि प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं।
शाम को इन मंदिरों में देवी प्रतिमाओं का मनोहारी शृंगार किया गया। कहीं छप्पन भोग तो कहीं फूलबंगला की झांकी सजाई गई। शाम से ही यहां फिर भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। आधी रात तक भक्त उमड़ते रहे। बौहरे वाली देवी मंदिर पर तो भक्तों की लंबी कतार नजर आई। देवी के दर्शन के लिए भक्तों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। सभी मंदिर सतरंगी रोशनी से जगमगा रहे थे और मंदिरों के बाहर बच्चे, युवा और महिलाएं खेल-तमाशों का लुत्फ उठा रही थीं। चाट-पकौड़ी का भी जायका लिया।