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अंग्रेजों के जमाने से हो रही हरदुआगंज की रामलीला

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रौदास सिंह चौहान - फोटो : CITY OFFICE
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कस्बे में अंग्रेजों के जमाने से यहां रामलीला का मंचन चल रहा है। स्थानीय कलाकार ही मंचन करते हैं। रामलीला देखने के लिए कस्बा ही नहीं, दूर-दराज से भी लोग इस ऐतिहासिक रामलीला को देखने आते हैं।
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कस्बे के 90 वर्षीय समाजसेवी दाऊ दयाल बंसल का कहना है कि कस्बे में रामलीला अंग्रेजी शासन काल से उनके दादा के जमाने से हो रही है। रामलीला में अहम भूमिका निभाने वाले श्रीराम चरित्र नाट्य मंच क्लब के आचार्य पंडित रवेंद्र शर्मा का कहना है कि वह 40 साल से मंचन कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य किरदारों को निभाया है। क्लब में जुड़े कस्बे के विजेंद्र सिंह चौहान, प्रदीप चौहान, राजीव लोचन, अनेक पाल सिंह, केके राघव, सुभाष चंद शर्मा, विजय राघव एवं राधेलाल आदि सदस्य अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
आनंदित करती है नौका विहार की लीला
रामलीला में नौका विहार की लीला का मंचन बरौठा स्थित अपर गंग नहर पर किया जाता है। रामलीला के दौरान श्रीराम बरात, मां काली की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली जाती है। श्री राम विवाह के दिन गरीब कन्याओं का विवाह कराने की परंपरा पिछले कई साल से जारी है। आचार्य रवेंद्र शर्मा के अनुसार, 10-15 कलाकार ऐसे हैं, जो करीब पांच दशक से मंचन कर रहे हैं।
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अलीगढ़ समेत आसपास के राजे-रजवाड़े यहां की रामलीला देखने आते थे। महाकवि पं. नाथूराम शंकर शर्मा ने भी रामायण का पाठ किया था, उनके दोहे आज भी रामलीला के पर्चों पर मुद्रित किए जाते हैं। - इं देशराज सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार।
कस्बे में देश की आजादी से पहले रामलीला का मंचन हो रहा है। आज भी रामलीला का मंच अपनी पुरानी परंपरा को बनाए हुए है। - दाऊ दयाल बंसल, समाजसेवी
स्थानीय कलाकार केवल सम्मान पाने के लिए रामलीला का मंचन करते हैं। जिले में हरदुआगंज की रामलीला सबसे अलग होती है। - पं. रवेंद्र शर्मा आचार्य , संचालक श्रीराम चरित्र नाट्य मंच
रामलीला में नौका विहार, काली मेला, रावण दहन सब विशिष्ट हैं, आज भी दूरदराज से दर्शक यहां के कलाकारों का मंचन देखने के लिए आते हैं। - रौदास सिंह, पूर्व प्रधान हरदुआ देहात

वयोवृद्ध दाऊ दयाल बंसल- फोटो : CITY OFFICE

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