शहर में सोमवार से रामलीला का मंचन शुरू होकर दशहरा बाद तक होगा । कई कस्बों में इस सप्ताह से मंचन की तैयारी है। इन लीलाओं में दर्शक श्रद्धा भाव से प्रभु राम के चरित्र का मंचन देखते हैं । हालांकि देहात के कस्बा खैर व जट्टारी में रविवार से ही रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। जिले में यदि देखा जाए तो सबसे बड़ी रामलीला श्री रामलीला गौशाला कमेटी की ओर से अचल ताल पर भव्यता से होती है। यहां की सरयू पार लीला तो पश्चिमी यूपी में प्रसिद्ध है। दशहरे के बाद भी यहां रामलीला का आयोजन होता है। इस दौरान निकाले जाने वाली शोभा यात्राएं और काली शोभायात्रा देखते ही बनती है। राम बारात का भी भव्य आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए शहर के लोग उमड़ पड़ते हैं। नयनाभिराम झांकियां लोगों को भक्ति भाव से भर देती हैं।
इस बार अचल ताल पर नहीं होगी सरयूपार लीला
करीब 100 वर्ष में यह दूसरी बार हो रहा है, जब सरयू पार लीला अचलताल में नहीं होगी । इसका सांकेतिक मंचन रामलीला भवन पर ही होगा। श्री आदर्श रामलीला मंडल, मथुरा के कलाकार रामलीला में मंचन करेंगे। सभी कलाकार देर रात अलीगढ़ आ गए हैं। इसमे सीता का किरदार महिला कलाकार निभाएंगी। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विमल अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी गुंजित वाष्र्णेय ने बताया कि अचलताल की रामलीला का इतिहास 100 वर्ष से भी अधिक समय का हैं। आजादी से पहले भी यहां उत्साह के साथ रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। रामलीला महोत्सव का शुभारंभ शहर के उद्योगपति धनजीत वाडरा गणेश पूजन कर करेंगे। शहर की टीकाराम कॉलोनी, भमोला, तिकोना नगला आदि स्थानों पर भी रामलीला होती है। इन स्थानों पर रामलीला कमेटी और क्षेत्रीय लोगों की मदद से रामलीला का मंचन बाहर से आने वाली मंडली के कलाकारों द्वारा किया जाता है। भमौला में रामलीला में तो स्थानीय कलाकार मंचन करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी होती हैं भव्य राम लीलाएं
जिले भर में भी रामलीलाओं का आयोजन होता है। यहां करीब एक महीने तक राम लीलाएं होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता है। पूरा पांडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठता है । जिले में कस्बा अतरौली, छर्रा, हरदुआगंज, अकराबाद, जलाली, गंगीरी, इगलास, विजयगढ़, चंडौस, जट्टारी, पिसावा,गोरई, बेसवां, खैर आदि क्षेत्रों में राम लीलाएं इसी सप्ताह से शुरू होनी हैं।