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राज्य कर्मचारी समिति: 99 साल के पट्टों में बांट दी 300 करोड़ की भूमि, एसआईटी जांच पूरी, शासन को भेजी रिपोर्ट

Fri, 28 Mar 2025 10:26 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

नियम के अनुसार समिति को पट्टे या बैनामे कराने से पहले उपनिबंधक से स्वीकृति लेनी थी। बाद में प्रबंध समिति की बैठक में पट्टे या बैनामे का अनुमोदन लेना था। बावजूद इसके पट्टों पर पिछले दिनों कुछ सदस्यों ने शासन में शिकायत की। जिसमें समिति सचिव व कुछ जिले के प्रशासनिक व आवास विकास आदि के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए।
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घोटाला सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राज्य कर्मचारियों व पेंशनरों के अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए बनी असदपुर साइट की 300 करोड़ रुपये कीमत की 15.71 हेक्टेयर भूमि 99 साल के पट्टे के जरिये बंदरबांट कर दी गई। इस संबंध में शासन के निर्देश पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने जांच पूरी कर शासन को भेज दी है। जिसमें राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति के पदाधिकारियों व चार बड़े अफसरों की गर्दन फंस रही है। हालांकि जांच रिपोर्ट में गबन की रकम का उल्लेख नहीं है मगर 62 पट्टे करने में अनियमितता व बड़ी स्टांप कर चोरी सामने आई है। अब संकेत हैं कि बहुत जल्द शासन से इस मामले में बड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी होंगे।

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राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति में विवाद की शुरुआत 2005 के बाद असदपुर साइट पर सदस्यों को प्लाट आवंटित न होने पर हुई। जब यहां वरीयता क्रम छोडक़र प्लाट आवंटन, समिति में संशोधन के बाद बाहरियों को सदस्य बनाने में मनमर्जी करने पर विवाद बढऩे लगे तो पूर्व आयुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने जांच शुरू कराई। कुछ किसानों व बिल्डरों के जरिये विवाद सिविल न्यायालय पहुंचा दिया गया। बाद में समिति में विवाद बढऩे पर एक अंतरिम समिति बनाई गई। जिसमें तत्कालीन एसीएम अध्यक्ष बने। उसके बाद भी प्रबंध समिति की बिना संस्तुति के पुराने सर्किल रेट तक से मनमर्जी पट्टे किए गए।

नियम के अनुसार समिति को पट्टे या बैनामे कराने से पहले उपनिबंधक से स्वीकृति लेनी थी। बाद में प्रबंध समिति की बैठक में पट्टे या बैनामे का अनुमोदन लेना था। बावजूद इसके पट्टों पर पिछले दिनों कुछ सदस्यों ने शासन में शिकायत की। जिसमें समिति सचिव व कुछ जिले के प्रशासनिक व आवास विकास आदि के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। इसी पर एसआईटी का गठन हुआ। जिसकी जांच एसआईटी ने पूरी कर शासन को भेज दी है। सूत्रों के अनुसार इस जांच रिपोर्ट में समिति द्वारा बिना अनुमोदन 62 पट्टे करने, सदस्य बनाने, पुराने सर्किल रेट से पट्टे करने में स्टांप कर चोरी करने, बिल्डर व किसानों से सांठगांठ करने आदि के नाम पर 300 करोड़ से अधिक के गबन का अंदेशा है। गबन की रकम का आंकलन शासन स्तर पर कराया जा सकता है।

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शासन के निर्देश पर बनी एसआईटी में अध्यक्ष के नाते दो सदस्य डीआईजी व एडीए वीसी संग मेरे द्वारा जांच की गई। जांच में बहुत सी कमियां सामने आई हैं। चूंकि रिपोर्ट गोपनीय है। उसे शासन को भेज दिया गया है। अब शासन कार्रवाई तय करेगा।-संगीता सिंह, मंडलायुक्त
इस भूमि संबंधी मामले में हमें एसआईटी में शामिल किया गया था। आयुक्त कार्यालय में सुनवाई व जांच में हम शामिल रहे। जांच पूरी हो गई है।-प्रभाकर चौधरी, डीआईजी रेंज
राज्य कर्मचारी विकास लोक आवास सहकारी समिति की असदपुर, किशनपुर व धनीपुर संबंधी साइटों की जांच एसआईटी द्वारा की गई। जिसमें हम भी शामिल रहे। जांच पूरी कर एसआईटी अध्यक्ष मंडलायुक्त द्वारा रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब कार्रवाई वहीं से तय होगी।-अपूर्वा दुबे, एडीए वीसी

हाईकोर्ट में बताया पार्क, फिर प्लॉट काट दिए
जांच में यह भी पाया गया कि 2007 में किशनपुर साइट के जिस भूखंड पर एडीए द्वारा सड़क बनाने का प्रयास किया। उसके खिलाफ समिति ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए शपथ पत्र दिया कि वह हरित पट्टी यानि पार्क है। बाद में उसी भूखंड पर समिति ने पट्टे के जरिये प्लॉट काट दिए।
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इन 10 गड़बडिय़ों पर जांच में इशारा

-समिति के सदस्यों को प्लाट देने में नियम दरकिनार किए।
-वरीयता क्रम में सदस्यों को प्लाट आवंटित नहीं किए गए।
-निर्धारित 750 से कई गुना 35000 सदस्य बना दिए गए हैं।
-बिना प्रबंध स्वीकृति के मनमर्जी लोगों को पट्टे किए गए।
-असदपुर साइट की 15.71 हेक्टेयर भूमि में अधिकांश पट्टे।
-एसआईटी जांच जारी होने के बावजूद 10 पट्टे किए गए।
-एसआईटी जांच में कुल 62 पट्टों पर खड़े हो रहे सवाल।
-किशनपुर साइट के पार्क में पट्टे पर भी सवाल खड़े किए।
-अंतरिम समिति में शामिल अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध।
-पट्टे से ली रकम व स्टांप की रकम में गोलमाल माना हैं।

ये है विवाद का प्रकरण
राज्यकर्मचारियों व पेंशनरों के लिए वर्ष 1988 में अपने जिले में राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति अस्तित्व में आई। जिसमें किशनपुर, धनीपुर व असदपुर पर तीन साइटें विकसित करना निर्धारित किया गया। जिसमें किशनपुर व धनीपुर की साइटें तो 2005 के पहले तक विकसित हो गईं। मगर असदपुर साइट के विकसित होने के बाद से ही विवाद शुरू हुए और समिति के पदाधिकारियों पर नियमों की अनदेखी, समिति के धन का गबन, बिल्डरों से सांठगांठ सरीखे आरोप लगे। इसी में शासन ने मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एसआईटी बनाई, जिसमें डीआईजी व एडीए वीसी को शामिल किया था। समिति ने जांच पूरी कर शासन को भेज दी है।
 
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