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RMPSU: तीसरे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन ने की शिरकत, 50 मेधावियों को स्वर्ण पदक से किया सम्मानित

Mon, 06 Jul 2026 12:36 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना है।
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मेडल पाने के बाद राज्यपाल के साथ यादगार फोटो - फोटो : संवाद
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विस्तार
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (आरएमपीयू) के तृतीय दीक्षांत समारोह में सोमवार को शिक्षा, सम्मान और प्रेरणा का भव्य संगम देखने को मिला। शीला गौतम सेंटर फॉर लर्निंग सभागार में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के 50 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। स्वर्ण पदक पाकर मेधावियों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई। पदक में छात्राओं का वर्चस्व रहा। 50 में से 33 स्वर्ण पदक छात्राओं और 17 छात्रों को मिले। इसके साथ ही 51 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह का शुभारंभ वंदे मातरम् से किया। फिर कुलगीत प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

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कुलाधिपति पदक एसएलआरएस खैर के नितिन कुमार को प्रदान किया। नवाचार, शोध, शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डीएस कॉलेज के शिक्षक डॉ. सुरेंद्रपाल सिंह, डॉ. अजय कुमार, डॉ. गुंजन अग्रवाल को सम्मानित किया गया। वहीं, प्राथमिक विद्यालय ल्हौसरा लोधा की कक्षा सात की छात्रा कशिश ने मां की महिमा पर व्याख्यान दिया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों की छात्राओं ने जल संरक्षण पर नाटक मंचन किया। छात्राओं ने ब्रज संस्कृति पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के लिए खेल सामग्री प्रदान की गई।
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल यह बोलीं

कपड़ों से नहीं, विचारों से मॉडर्न बनें युवा : राज्यपाल
युवा कपड़ों से नहीं, विचारों से मॉडर्न बनें। अपनी जड़ाें को पकड़कर रखें, यही सफलता का मंत्र है। ये बातें सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में कहीं। उन्होंने आह्वान किया कि भारत के उज्ज्वल भविष्य का निर्माता बनने के लिए युवाओं को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। इससे पहले उन्होंने समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 50 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए।

उसमारोह में उन्होंने घोषणा की कि अब प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्राओं का हीमोग्लोबिन टेस्ट होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना भी है। विश्वविद्यालय को गुणवत्ता, अनुशासन और बेहतर शिक्षण व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि राजा महेंद्र प्रताप स्वयं शिक्षक थे, इसलिए उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट शिक्षकों की परंपरा विकसित होनी चाहिए। शिक्षक को एक समाज सुधारक के रूप में प्रस्तुत करना होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 12वीं की छात्राओं को स्कूटी देने की पहल की थी, जो भारत में पहला राज्य था। इसके लिए मानक रखा गया कि 90 फीसदी अंक, जो ग्रामीण अंचल के सुविधाहीन छात्राओं के लिए मुश्किल है। होना ये चाहिए कि जरूरत के हिसाब से स्कूटी दी जानी चाहिए। इसमें जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी लेनी होगी। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में खामियां मिली थीं, जिस पर फटकार भी लगाई है।

उन्होंने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए डिजिलॉकर और समर्थ पोर्टल को उच्च शिक्षा में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि समर्थ पोर्टल पर प्रवेश, परीक्षा परिणाम, प्रमोशन सहित 43 प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। राज्यपाल ने सांसद और विधायकों से विश्वविद्यालय के विकास में सक्रिय सहयोग देने की अपील की। उन्होंने पीडब्ल्यूडी द्वारा भवन हैंडओवर न करने का भी जिक्र किया।

कौशल विकास और नवाचार से नए अवसरों का निर्माण कर रहा आज का भारत : प्रो. शेखर
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. शेखर सी. मांडे ने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग कर हर चुनौती को अवसर में बदलना होगा। आज का भारत आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और नवाचार के माध्यम से नए अवसरों का निर्माण कर रहा है। इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्र की संप्रभुता और समाज के उत्थान में योगदान देना भी है। उपाधि केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारी का प्रतीक है। प्रो. मांडे ने विश्वविद्यालय, प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा एचपीवी टीकाकरण अभियान की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जीवन त्याग राष्ट्रभक्ति और शिक्षा के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तनाव को सकारात्मक सोच के साथ नियंत्रित करें, असफलताओं से सीख लें और साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ जीवन में आगे बढ़ें।

प्रो. शेखर को मिली मानद डी.लिट्
दीक्षांत समारोह में प्रख्यात वैज्ञानिक, जीव विज्ञानी और शिक्षाविद प्रो. शेखर चिंतामणि मांडे को विज्ञान व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डी.लिट. (डॉक्टर ऑफ लेटर्स) की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें प्रदान किया। प्रो. मांडे ने पिछले तीन दशकों से अधिक समय में विज्ञान, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रो. मांडे को वर्ष 2005 का शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार भी मिल चुका है।

75 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज फहराया
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित पुस्तकालय का उद्घाटन किया। उन्होंने 75 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज फहराया। मां-बेटी सम्मेलन में छात्राओं और उनकी माताओं से संवाद किया। उन्होंने महिला स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षित मातृत्व और पारिवारिक मूल्यों पर विशेष जोर देते हुए विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में महिला स्वास्थ्य संबंधी विषयों को शामिल करने की आवश्यकता भी बताई।

छात्रावास, कैंपस और डिजिटल सुविधाओं पर दिया जोर
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, कैंपस में कैंटीन, बैंक, पोस्ट ऑफिस, पर्याप्त पार्किंग, वाई-फाई और सोलर ऊर्जा जैसी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मियावाकी वन विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

एयरपोर्ट से नहीं, टीकाकरण से मजबूत होगा देश
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीका लगवाने वाली छात्रा माधुरी शर्मा, संध्या, दीपिका, तानिया, छाया, काव्या, नेहा, अंशिका, प्राची, डॉली को प्रमाणपत्र प्रदान किए। इस दौरान 55 बालिकाओं को एचपीवी टीका लगवाया गया। उन्होंने कहा कि एम्स और एयरपोर्ट बनाने से नहीं, बल्कि टीकाकरण से देश मजबूत होगा। विकसित भारत बनेगा।

राज्यपाल ने छात्राओं को बताया कि एचपीवी टीका गर्भाशय कैंसर से बचाव की दिशा में एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि अपनी 9-14 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराकर इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। राज्यपाल ने बालिकाओं को अपनी साथी सहेलियों को भी टीका लगवाने के लिए प्रेरित करने को कहा।

डीएम अविनाश कुमार, एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने राज्यपाल से मुलाकात कर ओडीओपी के तहत ताला प्रदर्शनी किट भेंट करते हुए उनका आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सीडीओ योगेंद्र कुमार, प्रो. नीता वार्ष्णेय आदि मौजूद रहीं। संचालन डॉ. अंशु सक्सेना ने किया। 

नजरों का नजारा

हमारी सरकार है, आगे बैठिए
दीक्षांत समारोह के दौरान हल्का-फुल्का और मजेदार पल उस समय देखने को मिला, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कुछ पदाधिकारी सभागार की पीछे की पंक्ति में बैठे थे। तभी सांसद सतीश गौतम की नजर उन पर पड़ी। गुस्सा होते हुए सांसद ने कहा, सरकार हमारी है... आगे आकर बैठिए। सांसद के आग्रह के बाद आरएसएस के पदाधिकारी भी मुस्कुराते हुए आगे की पंक्ति में जाकर बैठ गए।
कुर्सी बोली—जरा संभलकर
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कुर्सियां भेंट करते समय कुलपति के हाथ से कुर्सियां दो बार नीचे गिर गईं। मंच पर मौजूद लोगों ने तुरंत संभाल लिया और कार्यक्रम बिना रुके आगे बढ़ गया।
तिरंगे ने भी लिया टेक्निकल टाइम आउट
75 फीट ऊंचे ध्वज स्तंभ पर तिरंगा फहराने के लिए बटन दबाया गया, लेकिन मशीन ने कुछ पल तक सहयोग नहीं किया। कर्मचारियों ने पूरी ताकत लगा दी और आखिरकार तिरंगा शान से लहराने लगा। तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली।
राज्यपाल से मिलने का भी ग्रीन सिग्नल जरूरी
सांसद सीधे राज्यपाल के पास नहीं पहुंचे। पहले मंच पर तैनात सुरक्षा अधिकारी से वार्ता की, फिर मुलाकात का रास्ता खुला। इसके बाद उन्होंने मुलाकात की।
मेधावियों के साथ गुरु भी मंच पर
इस बार पहली बार मेधावियों के साथ उनके प्राचार्यों और माता-पिता को भी मंच पर बुलाया गया। तस्वीरों में सफलता के साथ संस्कार भी नजर आए।
गुरु नहीं आए तो मंच से ही हाजिरी लग गई
एक मेधावी के साथ प्राचार्य नहीं पहुंचे तो कुलपति ने मंच से ही नाराजगी जता दी। संदेश साफ था विद्यार्थी का सम्मान हो और गुरु गायब रहें, यह मंजूर नहीं।
आरक्षित कुर्सियां करती रहीं इंतजार
कुछ कुर्सियों पर नाम तो बड़े-बड़े थे, लेकिन मेहमान नहीं आए। नतीजा, कुर्सियां पूरे कार्यक्रम में वीआईपी का इंतजार ही करती रह गईं।
शंखनाद से गूंजा सभागार
राज्यपाल के प्रवेश के साथ शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार हुआ। धीरे-धीरे कदमों से राज्यपाल मंच तक पहुंचीं।
कई चेहरे पढ़ने लगे एक-दूसरे को
कुलपति ने जब अंकपत्र और डिग्री के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने वालों पर सख्त टिप्पणी की तो सभागार में बैठे कई अधिकारी और कर्मचारी अनायास ही एक-दूसरे की ओर देखने लगे।
चॉकलेट के साथ मिली सीख
कुलपति ने बच्चों को चॉकलेट दी, लेकिन अभिभावकों को नसीहत भी दे दी कि बेटी-बेटे में भेदभाव छोड़िए। बेटी सरकारी और बेटा प्राइवेट स्कूल में पढ़े, यह सोच अब बदलनी चाहिए।

250 करोड़ वाला जिक्र और तालियों की बारिश
जब कुलपति ने कहा कि पहले प्रवेश और अंकपत्र जैसी प्रक्रियाओं पर एजेंसी को भारी रकम चुकानी पड़ती थी, जबकि अब समर्थ पोर्टल से सब आसान हो गया है, तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
 
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बोलीं राज्यपाल-विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षक उत्कृष्ट क्यों नहीं
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने एक बार फिर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को केंद्र में रखा। उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान के दौरान जब एक ही संबद्ध कॉलेज के दो शिक्षकों को सम्मानित किया गया, तो उन्होंने मंच पर ही सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षक इस उपलब्धि से पीछे क्यों हैं?

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता, उत्कृष्ट शिक्षकों के निर्माण और जवाबदेही को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट विश्वविद्यालय की पहचान उसके उत्कृष्ट शिक्षकों से होती है और गुणवत्ता सुधार के लिए तय मानकों का नियमित मूल्यांकन व हिसाब-किताब भी रखा जाना चाहिए। दिलचस्प संयोग यह है कि आरएमपीयू के अब तक हुए तीनों दीक्षांत समारोहों में राज्यपाल स्वयं शामिल हुई हैं और हर बार उन्होंने एक ही संदेश और संकल्प दोहराया कि विश्वविद्यालय और कॉलेज तभी आगे बढ़ेंगे, जब उनके शिक्षक उत्कृष्ट होंगे और शिक्षा की गुणवत्ता लगातार बेहतर होगी।

पहली बार जब उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान के लिए एक ही संबद्ध कॉलेज के दो शिक्षकों के नाम घोषित हुए तो राज्यपाल ने मंच पर ही सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षकों से ऐसा क्यों नहीं हो पाया? उनके इस सवाल ने समारोह में मौजूद शिक्षकों और अधिकारियों को आत्ममंथन का संदेश दिया। राज्यपाल ने कहा कि उत्कृष्टता केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह विश्वविद्यालय की कार्य संस्कृति का हिस्सा बननी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि गुणवत्ता सुधार के लिए तय किए गए मानकों, नवाचारों और उपलब्धियों का नियमित मूल्यांकन तथा हिसाब-किताब रखा जाए, जिससे हर वर्ष प्रगति का आकलन हो सके।
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