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Aligarh News: दूसरों की मदद करने वाला राज हार गया जिंदगी की जंग

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राज की मौत के बाद विलाप दुखीं परिवार की महिलाएं। संवाद
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दूसरों की मदद करने वाले सामाजिक-राजनीतिक रूप से सक्रिय राज सक्सेना उर्फ जॉनी भाई ने जान क्यों दी? इसका जवाब किसी के पास नहीं, पुलिस भी इस बिंदु पर जांच कर रही है। उनकी मौत के डेढ़ घंटे बाद फेसबुक पर पहली पोस्ट सामने आई, जिसमें उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री कन्या महाविद्यालय में आत्महत्या करने की जानकारी दी। पोस्ट सामने आते ही परिचित दौड़े, लेकिन उससे पहले राज ने जान दे दी।
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राज सक्सेना पूर्व में भाजपा आईटी सेल में पदाधिकारी रहे। वह अलीगढ़ हेल्पलाइन के नाम से एक संगठन चलाते थे। कायस्थ महासभा, सासनी गेट व्यापार संगठन, माहेश्वरी क्रिएटिव क्लब आदि कई संगठनों में भी सक्रिय रहते थे। परिवार में पत्नी अंकिता के अलावा स्नातक में पढ़ रहा बेटा आदित्य उर्फ कान्हा, नौवीं कक्षा में पढ़ रही आराध्या उर्फ परी हैं। घर में वे अपने छोटे भाई अरविंद व चाचा मनीष सक्सेना भी परिजनों सहित रहते हैं।


चाचा के अनुसार 2023 में राज को दिल की परेशानी हुई थी, तब ऑपरेशन हुआ था। उसी दौर से वह कायस्थ समाज द्वारा संचालित लाल बहादुर शास्त्री कन्या महाविद्यालय में ही कार्यरत थे। सुबह 11 बजे घर से कॉलेज जाने के बाद वह नियमित दो बजे खाना खाने घर आते थे, लेकिन बुधवार को वह इस समय घर नहीं आए।
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उन्होंने बताया कि इन दिनों कॉलेज बंद हैं, मगर वर्तमान में वह कॉलेज की कंप्यूटर लैब में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को कॉल करने का काम करते थे। रहा था। ऐसा किन वजहों से किया, इस हम लोग समझ नहीं पा रहे हैं। उधर, पुलिस सर्विलांस टीम ने राज के मोबाइल को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

सेक्शन इंजीनियर ने लगाई आवाज, पर सुनी नहीं
दोपहर में राज सक्सेना कॉलेज से किसी समय छर्रा अड्डा पुल के नीचे पहुंचे, यहां उन्होंने वार्ष्णेय कॉलेज के आसपास बाइक खड़ी की। इसके बाद पैदल ट्रैक पर पहुंच गए। वहां रेलवे के सैक्शन इंजीनियर टीम संग काम कर रहे थे।


उन्होंने राज को ट्रैक पर पला फाटक की ओर जाते देखा। इसी बीच दिल्ली से स्टेशन क्रॉस कर कानपुर की ओर जा रही सुपरफास्ट ट्रेन आई तो उन्होंने राज को शोर मचाकर हटने को कहा, लेकिन वह नहीं हटे और पीछे से आती ट्रेन की चपेट में आकर उसका शरीर कई टुकड़ों में बंट गया।


पहले कॉलेज में किया आत्महत्या का प्रयास
आरपीएफ के मेमो के अनुसार स्टेशन को पहली सूचना दोपहर 2:52 बजे मिली। आत्महत्या संबंधित पोस्ट वायरल होने के बाद उनके कुछ मित्र, परिजन व सासनी गेट पुलिस वहां पहुंची तो वहां उनके कमरे में टेबल पर एक चाकू, कुछ टैबलेट व खून के धब्बे मिले।



वहां एक टहल रहे एक बच्चे ने बताया कि काफी देर पहले राज तो बाइक से कहीं चले गए। पुलिस के अनुसार राज ने पहले कॉलेज में ही नस काटकर आत्महत्या की कोशिश की होगी। बाद में किसी वजह से यहां से चले गए। इसी बीच चाचा राज को खोजते हुए छर्रा अड्डा पहुंचे तो वहां शव मिलने की खबर पर उन्होंने शव को पहचाना।


10 बजे तक खूब हंसी-मजाक की दोस्तों संग
कुछ दोस्तों ने बताया कि रोजाना की तरह वह दस बजे तक मोहल्ले में हमारे साथ बैठे थे। रोजाना की तरह हंसी मजाक व ठिठोली के बीच एक-दूसरे से हंसी में गाली-गलौज तक हुई। उनकी बातों से कहीं नहीं लगा कि मन में कुछ चल रहा है, वह ऐसा कदम उठा सकता है। भाजपा और तमाम संगठनों से जुड़े पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। शव पोस्टमार्टम केंद्र पहुंचाया गया। देर रात पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। सुबह उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।



फेसबुक पर लोगों ने जताया गहरा दुख
राज सक्सेना की पहली पोस्ट आने के बाद पहले तो लोग यही प्रतिक्रिया दे रहे थे कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। मगर जब कुछ देर में पता चला कि उन्होंने जान दे दी और उसके बाद भी उनकी पोस्ट आती रहीं तो लोग सोशल मीडिया पर दुख जताते रहे। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम शहर में चर्चाओं का विषय रहा।


खुद को दूसरी पत्नी बताने वाली महिला भी मौके पर पहुंची
इस खबर पर छर्रा अड्डा पुल पर कई संगठनों व डांस एकेडमी आदि से जुड़ीं एक महिला भी वहां पहुंच गई। सासनी गेट व गांधीपार्क पुलिस भी आ गई थी। इंस्पेक्टर सासनी गेट राजवीर सिंह परमार के अनुसार महिला ने वहां रोते हुए खुद को राज की दूसरी पत्नी बताया।

परिजनों ने इस बात को सिरे से नकार दिया है। खुद चाचा मनीष सक्सेना ने बताया कि यह बात बिल्कुल निराधार है। उनके भतीजे राज की एकमात्र पत्नी घर पर है। राज ने न कभी दूसरी शादी की और न हमारी जानकारी में है।

टूटे राज ने की आठ भावुक पोस्ट, बच्चों का ध्यान रखने का किया आग्रह
मरने से पहले राज ने फेसबुक पर आठ पोस्ट शेड्यूल की हुई थी। पहले पोस्ट सवा चार बजे, उसके एक घंटे बाद तीन और चार पोस्ट आठ बजे के आसपास आई। इनमें उन्होंने आर्थिक और मानसिक परेशानी का उल्लेख किया है।

इससे साफ हो रहा है कि वह गहरे अवसाद में थे। पहली पोस्ट में उन्होंने सभी को अंतिम प्रणाम करते हुए कहा है कि जब आप यह पोस्ट देख रहे होंगे तो मैं दुनिया छोड़ चुका हूंगा। सब कुछ खत्म हो गया परिवार को बेसहारा छोड़कर जा रहा हूं। 16 नवंबर 2019 से आज कि दिन तक परेशानी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी, मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक रूप से मैं बहुत बुरी तरह टूट गया हूं, अब हिम्मत नहीं बची है। पोस्ट में अपने शरीर को मेडिकल में दान करने की इच्छा जाती है।


दूसरी पोस्ट में बेटी और बेटे को हौसला बंधाया है। तीसरी और चौथी पोस्ट में बेटे के लिए कहा है कि वह बहुत मेहनती है और उसे जीवन में बहुत कुछ करना है। बहन और बहनोई से परिवार का ध्यान रखने के लिए कहा है। पांचवी पोस्ट में पत्नी के लिए लिखा है कि वह उनका सबसे बड़ा गुनहगार है। उन्होंने बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अब हिम्मत नहीं बची। अगली पोस्ट में बेटे से मोबाइल फोन के सिम बंद करने और फोन बेटी के लिए देने को कहा है। आखिरी पोस्ट में दो दोस्तों के नाम का उल्लेख करते हुए उनसे से बेटे कॅरिअर बनाने में मदद करने की बात कही है।

तो बच सकती थी राज की जान
राज ने जो कुछ किया, वह सभी जानने व चाहने वालों को हिला गया है। घर पर मौजूद पत्नी व दोनों बच्चों का हाल बेहाल है। परिवार के अन्य सदस्य, मित्र परिचित भी दुखी हैं। इस विषय में जानकार बताते हैं कि मेटा-फेसबुक के एआई और एल्गोरिदम द्वारा लाइव आत्महत्या के संकेत (जैसे- शब्दों, वीडियो या पोस्ट) पहचानते ही तत्काल एक इमरजेंसी अलर्ट जनरेट होता है,जो पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को भेज दिया जाता है। पुलिस तुरंत लोकेशन-ट्रेसिंग के जरिये यूजर के मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस से लोकेशन ट्रैक करती है और वहां पहुंच जाती है। इस मामले भी ऐसा हुआ, पुलिस पहुंची लेकिन पोस्ट शेड्यूल होने के कारण बाद में दिखी।

राज की मौत के बाद विलाप दुखीं परिवार की महिलाएं। संवाद

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