कोरोना संक्रमण ने अपनों के बीच दूरियां पैदा कर दी हैं। ऐसे में शहर के 39 वर्षीय राज सक्सेना कोरोना संक्रमितों एवं उनके परिजनों के मददगार बने हुए हैं। वह खाने-पीने के सामान से लेकर दवाएं व अन्य जरूरी सामान होम आइसोलेट मरीजों के घर तक पहुंचाते हैं। वह ऐसे मरीजों के परिजनों की भी मदद करते हैं, जो अस्पताल में भर्ती है।
कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन इससे लड़ाई को लेकर लोगों का उत्साह ठंडा पड़ता जा रहा है। शुरू के दिनों में गैर सरकारी संगठन, राजनीतिक दल, स्वयंसेवक एवं व्यक्तिगत स्तर पर लोग मदद करने के लिए आगे आए थे। परंतु अब वह उत्साह एवं जोश नहीं दिखाई दे रहा है जबकि हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। लेकिन सासनीगेट थाना क्षेत्र के राज सक्सेना एवं उनके जैसे कई लोग हैं, जो कोरोना संक्रमित परिवारों की मदद में जुटे हैं। वह आटा, दाल, चावल, सब्जी, गैस, दवा से लेकर अन्य जरूरी सामान संक्रमित मरीजों के घरों तक पहुंचाते है।
खास बात यह है कि राज सक्सेना एवं उनकी बेटी स्वयं कोरोना को पराजित कर चुके हैं। अलीगढ़ हेल्प लाइन, हिंदू युवा वाहिनी सहित कई संगठनों एवं सामाजिक संस्थाओं से राज सक्सेना जुड़े हैं।
राज सक्सेना ने बताया कि उनके परिचय के संक्रमित लोग जरूरी सामान के लिए फोन करते हैं। वह जरूरी सामान बाजार से लेकर उनके घर के दरवाजे पर रख देते हैं। कई घर तो ऐसे हैं कि पुरुष सदस्य अस्पताल में भर्ती है और घर पर महिलाएं एवं बच्चे रह गए हैं। ऐसे लोग भी मदद के लिए फोन करते हैं और वह उनकी मदद करते हैं।
पड़ोसी भी बन रहे मददगार
कोरोना वायरस से संक्रमित होकर होम आइसोलेट मरीजों के पड़ोसी भी मददगार बन रहे हैं। वह न सिर्फ दूध, सब्जी एवं खाने-पीने की चीजों की आपूर्ति की व्यवस्था करते हैं बल्कि बीच-बीच में फोन कर मनपसंद व्यंजन बनाकर घर भेजने की पेशकश भी करते हैं। लखनऊ से आए संचारी रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र वार्ष्णेय ने कुछ दिन पहले एक अध्ययन किया था, जिसमें पड़ोसियों द्वारा संक्रमित मरीज की मदद का सुखद पहल सामने आई थी। बारहद्वारी में एक परिवार के लोग संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हो गए तो मोहल्ले के लोगों ने उस परिवार के बच्चों की हर जरूरत का ध्यान रखा।