सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाएगा। शेल्टर होम में सिर्फ आक्रामक और बीमार कुत्ते रखे जाएंगे, बाकी को छोड़ा जाएगा। फैसले के दायरे में सभी राज्यों को लिया। नगर निगमों को आदेश कि वह भोजन समर्पित स्थल बनाएं। सार्वजनिक स्थान पर कुत्तों को खाना खिलाने से अगर कोई सरकारी कर्मचारी रोक रहा है और अगर उसका विरोध कोई एनजीओ कर रही है तो उस पर दो लाख जुर्माना, कोई व्यक्ति कर रहा है तो उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगेगा।
प्रतिदिन औसतन 800 लोगों को लगता है रैबीज इंजेक्शन
मलखान सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 210 लोग रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आते हैं। इसी तरह दीन दयाल संयुक्त अस्पताल में 190 और जिले की 16 सीएचसी पर 400 एंटी रैबीज इंजेक्शन लगते हैं। इस तरह प्रतिदिन औसतन 800 लोगों को रैबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें वह मामले भी शामिल हैं जो कुत्ते के काटने के बाद दूसरी, तीसरी या चौथी बार इंजेक्शन लगवा रहे होते हैं।
डॉग वेलफेयर एसोसिएशन ने कहा नसबंदी की रफ्तार धीमी
द अलीगढ़ डॉग वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव संदीप नक्षत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहते हैं कि एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के द्वारा नसबंदी की रफ्तार बहुत धीमी है। जो दावे किए जाते हैं वह भी धरातल पर नहीं हैं। अगर नसबंदी की प्रकिया सही हो तो काफी हद तक समस्या दूर हो सकती है।