काजी अब्दुल सत्तार पर उनकी आने वाली किताब ‘बातों मुलाकातों मेें’ वह उनके जीवन के जाने अनजाने पहलुओं को पाठकों के सामने लाने का प्रयास करेंगे। प्रेम कुमार कहते हैं कि इस पुस्तक में विधाओं की सीमाओं का अतिक्रमण है।
पढ़ते समय यह कभी उपन्यास लगेगा तो कभी बातचीत तो कभी जीवन वृतांत और आत्मकथ्य। समय-समय पर काजी साहाब के बारे में विभिन्न भाषाओं में बहुत कुछ छपता रहा है। दूसरी तरफ इसकी लोकप्रियता उन्हेें किताब को जल्दीबाजी में छपवाने से रोकता रहा।
इसके अलावा सत्तार साहब के जटिल व्यक्त्वि को सहज रूप में रखना भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती थी। पाठकों और उनके प्रशंसकों को सदैव उनके अंतरंग किस्सों में दिलचस्पी रही है। किताब के अगले एक महीने में पाठकों के हाथों में होने की संभावना है।
‘यह रचना उन काजी साहब के बारे में है जो उर्दू का वरेण्य रचनाकार है। एतिहासिक उपन्यासों के लेखन की दृष्टि से उनका स्थान, स्तर और महत्व अन्य रचनाकारों से कहीं अधिक बड़ा, अलग और अनूठा है। भाषा के लिहाज से उन्हें शब्दों का नामी-गिरामी जादूगर कहा-माना जाता है। ऐसे व्यक्ति -फनकार की- उसकी अपनी, उसके निज की, उसके अनुभव, ज्ञान व साहित्य संबंधी मूल्यों, मान्यताओं, संघर्षों की अधिकतम प्रमाणिक व्यथा कथा और जीवन की गाथा कहा जा सकता है’
- प्रेम कुमार, काजी अब्दुल सत्तार के विषय में, पुस्तक की भूमिका से