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Project Muon : गति, प्रकृति और असर के अध्ययन का प्रोजेक्ट 2035 तक बढ़ा, जिनेवा की महामशीन से जुड़ी है परियोजना

Wed, 18 Dec 2024 06:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा आशीष निगम, अलीगढ़

सार

केंद्र सरकार से इस प्राेजेक्ट को वर्ष 2035 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इससे युवा विज्ञानियों में उत्साह बढ़ गया है। एएमयू को इसके लिए 5.4 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।
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AMU - फोटो : आधिकारिक वेबसाइट (@amu.ac.in.)
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विस्तार
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स्विटजरलैंड के जिनेवा में महामशीन के जरिये ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाया जा रहा है। इसमें ब्रह्मांड के निर्माण में शामिल बेहद सूक्ष्म कण म्यूऑन की प्रकृति, गति और उनके असर का अध्ययन किया जा रहा है। एएमयू के भौतिक विज्ञानी भी इसमें लगे हैं। म्यूऑन एक इलेक्ट्रॉन से 200 गुना भारी होता है। इसकी गति प्रकाश की गति के बराबर होती है। अध्ययन में ज्यादा वक्त लग रहा है। इसीलिए केंद्र सरकार से इस प्राेजेक्ट को वर्ष 2035 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इससे युवा विज्ञानियों में उत्साह बढ़ गया है। एएमयू को इसके लिए 5.4 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।

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म्यूऑन की खोज के लिए जिनेवा में महामशीन के पास ही एलिश प्रोजेक्ट के तहत एक साढ़े तीन मंजिला ऊंचाई का म्यूऑन स्पेक्ट्रोस्कोप बनाया गया है। इस स्पेक्ट्रोस्कोप के लिए बनाए गए पांच डिटेक्टरों में से एक डिटेक्टर को एएमयू ने ही बनाया है। इससे मिलने वाले डाटा का अध्ययन भी एएमयू में ही होता है। अध्ययन के बाद इसकी रिपोर्ट सर्न कंपनी को जिनेवा भेजी जाती है।

एएमयू करता है डिटेक्टर की मरम्मत
इस डिटेक्टर की मरम्मत एएमयू के भौतिक विज्ञान विभाग के मो. मोहसिन खान और दानिश आजमी करते हैं। इनका अक्सर जिनेवा आना-जाना बना रहता है। विभाग की श्वेता सिंह, उमामा, निदा मलिक और बुशरा अली भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं। बुशरा अली हाल ही में जिनेवा से लौटी हैं। उन्होंने बताया कि अभी म्यूऑन की प्रकृति और उसकी गति का अध्ययन हो रहा है। इसकी गति प्रकाश के बराबर यानी बहुत तेज है, इसलिए अध्ययन में समय लग रहा है। इससे क्या-क्या और पता चलेगा यह अभी कहा नहीं जा सकता है।
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एएमयू और म्यूऑन का अध्ययन

  • 1996 से एएमयू म्यूऑन कणों का अध्ययन कर रहा है
  • 2008 से म्यूऑन कणों के अध्ययन के लिए जिनेवा में अध्ययन शुरू हुआ

प्रकृति में मौजूद बेहद सूक्ष्म कणों में से एक म्यूऑन है। इसका अध्ययन जारी है। इसमें अभी और वक्त लगेगा। यह बहुत धैर्य और मेहनत का प्रोजेक्ट है। इसकी खोज पूरी होने के बाद पूरी दुनिया बहुत कुछ जान सकेगी।

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-प्रो.अनीसुल एन उस्मानी, चेयरमैन भौतिक विज्ञान विभाग एएमयू

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