बाजार में सरकारी एनसीईआरटी की सस्ते दर वाली कुछ किताबें मिल नहीं रही हैं और कुछ किताबों पर अभी पाठ्यक्रम तय नहीं हुआ है। जबकि इससे इतर अनाधिकृत निजी प्रकाशकों (जिन्होंने यूपी बोर्ड के प्रकाशन का टेंडर नहीं लिया है) ने एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम बाजार में उतार दिया है। सरकारी सस्ती किताब पर फुटकर विक्रेता को एक भी रुपया नहीं मिलता है। वहीं निजी प्रकाशक की पुस्तक बेचने पर 30 प्रतिशत का कमीशन मिलता है। इस कारण बाजार में 100 रुपये के अंदर आने वाली किताबें 500 रुपये तक बिकती हैं।
यूपी बोर्ड ने अभी तक कक्षा दस और कक्षा 12 में अंग्रेजी की किताब का टेंडर नहीं किया है। इसके अलावा कक्षा 11-12 की गणित और कक्षा 12 की जीव विज्ञान की किताबें उपलब्ध ही नहीं हो रही हैं। अलीगढ़ शहर के साथ साथ जनपद के सभी ब्लॉकों में यह किताबें नहीं हैं। यही कारण है कि देहात के फुटकर किताब विक्रेता खाली हाथ ही वापस लौट रहे हैं। जबकि इन किताबों की जगह बाजार में अनाधिकृत प्रकाशकों ने नए पाठ्यक्रम वाली किताब बाजार में उतार दी हैं।
खास बात यह है कि यह किताबें सस्ती नहीं, बल्कि तीन गुने से ज्यादा महंगी हैं। यही किताबें बाजार में बेची जा रही हैं। इन किताबों के बिकने का एक और मुख्य कारण किताबों का कमीशन है। सरकारी सस्ते दर की किताबों पर पांच प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता है। जब थोक व्यापारी किताबों को अलीगढ़ मंगाता है तो कमीशन भाड़े में ही लग जाता है। ऐसे में थोक व्यापारी फुटकर किताब विक्रेता को सरकारी किताब अंकित मूल्य पर ही देता है। फुटकर व्यापारी अंकित मूल्य पर किताब खरीदने को तैयार भी हैं, लेकिन सबसे ज्यादा बिकने वाली कक्षा 11-12 की गणित और कक्षा 12 की जीव विज्ञान की किताब शहर में मिल ही नहीं रही हैं। ऐसे में दुकानदार खाली हाथ ही वापस लौट रहे हैं। जबकि अगर निजी प्रकाशक की एनसीईआरटी आधारित लिखे नोट वाली किताबें थोक व्यापारी को दस प्रतिशत और फुटकर व्यापारी को 30 प्रतिशत की बचत होती है। फुटकर विक्रेता एक विषय पर अनुमानित 100 से 150 रुपये बचा रहा है।
कक्षा 10 और 12 में पढ़ते हैं एक लाख बच्चे
कक्षा दस और कक्षा 12 में अलीगढ़ जनपद में लगभग एक लाख बच्चे पढ़ते हैं। जबकि कक्षा नौ व कक्षा 11 में भी लगभग एक लाख बच्चे पंजीकृत होते हैं। सरकारी किताबें न मिलने से मध्यम परिवार के यह बच्चे काफी परेशान हैं। कुछ एक सामर्थ्यवान बच्चे महंगी किताबें खरीदकर पढ़ रहे हैं।
-शहर में किताबें खरीदने आया था। सबसे ज्यादा विद्यार्थियों द्वारा मांगे जाने वाली कक्षा 11-12 गणित और कक्षा 12 की जीव विज्ञान की किताब मिल नहीं रही हैं। बाजार के कई चक्कर लगा चुका हूं। बिना कमीशन वाली किताब बेचना भी चाहें तो भी नहीं बेच पा रहे हैं।
- अशोक पचौरी, विकास बुक डिपो इगलास
- पूरे बाजार के चक्कर काट चुका हूं। कुछ किताबें बाजार में पुरानी मिल गई हैं, लेकिन गणित की किताब न मिलने से काफी परेशान हूं। मैं ही नहीं, मेरी कक्षा के सारे बच्चे परेशान हैं।
- तिलकमोहन, छात्र सरस्वती विद्या मंदिर
सोमवार से दर्ज होंगे दुकानदारों के बयान
डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने अमर उजाला द्वारा उठाई गई जनसमस्या को देखते हुए बाजार में पड़ताल कराई थी। जब कुछ किताबों के न होने की जानकारी मिली तो डीआईओएस ने सोमवार से दुकानदारों के बयान कराने का निर्णय लिया है। डीआईओएस ने बताया कि सोमवार से दुकानदारों के बयान कराएंगे। इसके बाद बयान के आधार पर रिपोर्ट बनाकर बोर्ड को भेजी जाएगी। प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द किताबें बाजार में आएं। जिससे गरीब छात्रों को सरकारी योजना का लाभ मिले। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकतर दुकानों पर सरकारी सस्ते दर वाली एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध होनी चाहिए। अगर उपलब्ध नहीं हैं तो भी बोर्ड को जानकारी दी जाएगी।