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जिला कारागार में बंदी ने फांसी लगाकर जान दी

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जेल में कैदी मोहन सिंह की मौत की सूचना पर पहुंचे एसीएम प्रथम कुलदेव सिंह। - फोटो : CITY OFFICE
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जिला कारागार में शुक्रवार की दोपहर दुष्कर्म और देह व्यापार के आरोपी एक बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक का भाई और भाभी भी इसी कारागार में इसी जुर्म में बंद हैं। मृतक के अन्य बंदी साथियों के मुताबिक उसका मुकदमा अब निर्णय सुनाए जाने की ओर था, जिसको लेकर वह बेहद विचलित था। जेल प्रशासन ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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दादों के गांव भाय का रहने वाला मोहन (24) पुत्र लाखन सिंह दुष्कर्म और देह व्यापार के एक मुकदमे में सन 2016 से कारागार में बंद था। उसका भाई कालीचरण और भाभी भी कारागार में बंदी हैं। मोहन की कार्यशैली और आचरण को देखते हुए उसे उसकी बैरक संख्या 17 का राइटर (एक प्रकार का अनुशासन बनाए रखने वाला कर्मी) बना दिया गया था। उसका मुकदमा अंतिम चरण में था और उसमें सभी गवाही और सुनवाई मोहन के खिलाफ गई थी। इस बात को लेकर वह विचलित रहता।
यह बात मोहन ने अपने साथी बंदियों से बताई भी थी। शुक्रवार को दोपहर दो बजे सभी बंदियों की मिलाई चल रही थी। इस बीच मोहन अपनी बैरक में पहुंचा और झाड़ू वाले से सफाई करवाई। इसके बाद झाड़ू वाले को जाने के लिए कह दिया। इसके कुछ देर बाद बैरक के पास बरगद के पेड़ से अंगोछे से गले में फंदा डालकर फांसी लगा ली। मिलाई के बाद जब सभी बंदी बैरक में पहुंचे और गिनती हुई तो एक बंदी कम पाया गया। जांच में पता चला कि मोहन नहीं है। तलाश करने पर उसका शव पेड़ पर फंदे से झूलता पाया गया। जेल अधीक्षक शुक्रवार को बाहर गए थे। जेल प्रशासन ने इसकी सूचना मजिस्ट्रेट और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को दी। इसके बाद जेल प्र्रशासन ने सभी औपचारिकताएं पूरी कीं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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बंदी मोहन दुष्कर्म और देह व्यापार के मुकदमे में विचाराधीन था। उसके आत्महत्या किए जाने के बाद निगरानी सिपाही की जवाबदेही तय की जा रही है कि वह घटना के समय कहां पर था? जबकि उसका काम ही बंदियों की निगरानी करना था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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- संजय जोशी, डिप्टी जेलर
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