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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हुई स्वैच्छिक

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब स्वैच्छिक हो गई है। किसान की इच्छा के ऊपर है कि वह योजना में शामिल हो या नहीं। किसानों को सलाह दी गई है कि यदि वे योजना से अलग होना चाहते हैं तो वे 24 जुलाई तक संबंधित बैंक को जानकारी दे दें। अन्यथा की स्थिति में उनका प्रीमियम कट जाएगा।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बड़ी संख्या में किसान असंतुष्ट थे। उनका आरोप था कि बैंक उन्हें बताये बगैर प्रीमियम काट लेती हैं और फसल में नुकसान होने पर जटिल प्रावधानों के कारण उन्हें फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने योजना को स्वैच्छिक कर दिया है। जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने बताया कि सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को फसल सत्र खरीफ-2020 से सभी कृषकों के लिये स्वैच्छिक कर दिया गया है। केसीसी धारकों को अब बैंक द्वारा फसल बीमा कराने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकेगा, ऋणी किसान स्वेच्छा से अपनी फसल का बीमा कराने या न कराने के लिये स्वतंत्र हैं ।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फसली ऋण लेने वाले किसान यदि अपनी फसलों का बीमा नहीं कराना चाहते हैं तो बैंक शाखा स्तर पर जहां से उनको फसली ऋण की सुविधा प्राप्त हुई है वहां 24 जुलाई तक लिखित रूप में जानकारी दे दें। अन्यथा कृषक के बैंक खाते से बैंक द्वारा फसल बीमा का प्रीमियम काट लिया जाएगा। उन्होंने अफसरों को योजना का प्रचार प्रसार करने को कहा है।
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