फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रपति की बगिया में हर्बल पौधा लगाएंगे शहाबुद्दीन

Tue, 10 May 2016 01:46 AM IST
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन
शहाबुद्दीन - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
विज्ञापन
भुजपुरा निवासी बागवान शहाबुद्दीन राष्ट्रपति की बगिया में पौधा लगाएंगे। राष्ट्रपति सचिवालय से इसके लिए हरी झंडी मिल गई है। यहीं नहीं राष्ट्रपति सचिवालय ने शहाबुद्दीन के इन अनोखे कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर के पास भी लेटर भेज दिया है।
विज्ञापन

भगवान भोले नाथ के भक्त शहाबुद्दीन अलीगढ़ में किसी परिचय के मोहताज नहीं है। बागवानी में उन्होंने कई अनोखे कार्य किए है। पांच फीट ऊंचा कैलीगोबी का पौधा बेमौसम उगाकर इन्होंने अपना नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज करा चुके है। अप्रैल में राष्ट्रपति सचिवालय एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से संपर्क कर गार्डेन में हर्बल पौधा लगाने की अनुमति का आग्रह किया था। उनका दावा है कि यह हर्बल पौधा दांत की अंदरूनी बीमारियों के उपचार में जबर्दस्त कार्य करता है। पायरिया या खून के रिसाव के साथ ही अन्य कई तरह की परेशानियों से यह छुटकारा दिला सकता है। उनका यह भी दावा है कि अब तक तीन सौ लोगों को इस पौधे की टहनी एवं पत्तों के माध्यम से रोग से छुटकारा दिला चुके है। शहाबुद्दीन ने बताया कि उन्हें राष्ट्रपति सचिवालय एवं प्रधानमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिल गई है। बारिश शुरू होने के बाद जुलाई महीने में वे राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री की बगिया में पौधा लगाएंगे।
अब्बू के दांत में परेशानी होने पर दादा ने बताया था उपचार
शहाबुद्दीन भगवान भोले नाथ के भक्त है और कहते है कि आज तक जो कुछ भी हासिल किया, उन्हीं की कृपा से हुआ। वे कहते है कि बचपन में अब्बू के दांत में परेशानी होने पर दादा ने अलैवा की टहनी से दातून करने व पत्ता चबाने का सुझाव दिया था। इससे अब्बू की परेशानी दूर हो गई थी। इस घटना को वे भूल गए थे लेकिन दांत में परेशानी होने पर दादा की बातें याद आई और वे अलैवा की खोज में लग गए। एएमयू कैंपस समेत तीन स्थानों पर उन्हें यह पेड़ नजर आया और उसकी टहली से दातून किया तो दांत की बीमारी दूर हो गई। उनका दावा है कि अब तक करीब तीन सौ लोगों का उपचार कर चुके है। इस पेड़ का जवाब नहीं है। बागवानी का काम करने वाले शहाबुद्दीन इस पेड़ का बोटनिकल नाम नहीं जानते है। शहाबुद्दीन इस पेड़ की खोज का अपना रिसर्च मानते है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें