हाईकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष अलीगढ़ उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव वापस कर दिया है। कोर्ट ने नए सिरे से अविश्वास प्रस्ताव लाने की छूट दी है। कोर्ट ने एक बार निरस्त हो चुके प्रस्ताव पर दुबारा डीएम द्वारा नोटिस जारी करने को गलत करार दिया है। उपेंद्र सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि एक जुलाई 2017 को जिला पंचायत के 29 सदस्यों ने जिलाधिकारी को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा। इस प्रस्ताव पर चार सदस्यों के हस्ताक्षर संदिग्ध मानते हुए डीएम ने प्रस्ताव निरस्त कर दिया।
इसके बाद चारों सदस्यों ने डीएम से मुलाकात कर अपने हस्ताक्षर की पुष्टि की। डीएम ने उनकी बात स्वीकार करते हुए 12 जुलाई 2017 को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जारी कर दिया। जबकि डीएम को ऐसा करने का अधिकार नहीं है।
अविश्वास प्रस्ताव पर डीएम की भूमिका पोस्ट ऑफिस की तरह ही होती है। उनको नया अविश्वास प्रस्ताव मांगना चाहिए था मगर जिलाधिकारी ने अपने विवेक का प्रयोग नहीं किया। कोर्ट ने इसे गलत माना। विपक्षी सदस्यों ने स्वयं अपना अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने की कोर्ट से इजाजत मांगी साथ ही नया प्रस्ताव लाने की छूट देने का भी अनुरोध किया। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव वापस कर दिया है।
फिर से अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की तैयारी
जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव साबित करने के लिए 29 जुलाई को होने वाली बैठक फिलहाल टल गई है। इस तरह अविश्वास प्रस्ताव लाने की कवायद कर रहे विरोधी खेमे को झटका लगा है और विरोधी खेमा नए सिरे से अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की तैयारियों में जुट गया है।
भाजपा समर्थित खेमे से न्यायालय पहुंचे जिला पंचायत सदस्य अजीत गौड़ ने बताया कि प्रशासनिक गलती से हमें बड़ी राहत मिली है। इसके बाद विरोधी खेमे को दोबारा से अविश्वास प्रस्ताव डीएम को देने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि हम आश्वस्त हैं और दोबारा से शपथ पत्रों के साथ अविश्वास प्रस्ताव लेकर एक दो दिनों में डीएम के पास जाएंगे।
32 सदस्यों का समर्थन हमारे साथ है। भाजपा समर्थित खेमे के पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिव नारायण शर्मा ने बताया कि न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए हम दोबारा से शपथ पत्रों के साथ डीएम के समक्ष प्रस्तुत होंगे और उनसे अविश्वास प्रस्ताव के लिए जिला पंचायत की बैठक बुलाने की तारीख मांगेगे।
अब अगले माह तक टली बैठक
न्यायालय के आदेश के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा अगले माह के लिए टल गया। विरोधी खेमा एक दो दिन में दोबारा से शपथ पत्र के साथ अविश्वास प्रस्ताव के लिए जिला पंचायत की बैठक बुलाने की मांग करेगा।
नियमानुसार प्रस्ताव आने के बाद डीएम कम से कम 15 और ज्यादा से ज्यादा 30 दिन के अंदर जिला पंचायत की बैठक बुला सकते हैं। ऐसे में अध्यक्ष की कुर्सी का फैसला अगले माह तक टलना तय है।
यह लोकतंत्र की जीत
जिला पंचायत सदस्य पति शैलेंद्र सिंह टिल्लू एवं व्यापारी नेता सौरभ अग्रवाल सिक्स संस ने उच्च न्यायालय के निर्णय को लोकतंत्र की जीत और विकास के विरोधियों की हार बताया है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष के विरोधियों ने बेवजह की राजनीति के चलते विकास का मार्ग अवरुद्ध किया हुआ है। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय से इनकी कुत्सित राजनीति पर करारा प्रहार किया है।
माननीय न्यायालय का आज का ऐतिहासिक निर्णय सच्चाई व लोकतंत्र की जीत का प्रतीक है। विरोधियों को अपना प्रस्ताव वकील के माध्यम से वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा, जिला पंचायत सदस्यों को हमारे राजनीतिक विरोधियों ने गुमराह कर बरगला दिया था।
अब वह भी उनसे अलग हो गए हैं। हमारे विरोधी जनता एवं जिला पंचायत सदस्यों को गुमराह करने के लिए तरह-तरह की बातें फैला रहे हैं। न्यायालय द्वारा दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया गया है। मुझे जिला पंचायत सदस्यों का भरपूर समर्थन, प्यार और सहयोग मिलता रहा है। अब भी मिल रहा है और भविष्य में भी इसी प्रकार मिलता रहेगा।
उपेंद्र सिंह नीटू, जिला पंचायत अध्यक्ष
हम अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं। अदालत ने प्रशासनिक गलती के चलते फिलहाल यह प्रक्रिया टाल दी है। हमें फिर से अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का मौका दिया है और हम इस बार पूरी तैयारी के साथ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे।
सुधीर चौधरी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष