केशोपुर जोफरी की गलियां, बीच गांव में भरा पानी और कूड़े का ढेर
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400 लोग बाहर खा रहे धक्के
शहर से सटे इस गांव के बेरोजगारी बड़ी समस्या बन चुकी है। यहां के 400 लोग वर्तमान में दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गुरुग्राम सहित एनसीआर के अलग-अलग शहरों में नौकरी या कोई न कोई काम करते हैं। यहां उन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता है। अजय सिंह तोमर कहते हैं कि वह डिफेंस कॉरिडोर में काम की तलाश में गए, लेकिन सिफारिश के बिना यहां कोई नौकरी नहीं मिलती। बोले-पूर्व में एसपी सिटी मान सिंह ने कुछ लोगों की सिफारिश कर नौकरी लगवा दी थी।
2800 पशु, अस्पताल नहीं
कोई राेजगार नहीं मिलने से परेशान ग्रामीण खेती या पशुपालन पर आश्रित हैं। यहां दो हजार भैंस, 400 गाय, 400 भेंड़ और बकरियां पली हैं। जिनके सहारे घर गृहस्थी चलती है। शहर से सटे होने के कारण दूध हाथों-हाथ बिक जाता है। पशुपालन को डेयरी उद्योग में बदला जा सकता है, लेकिन यहां एक अदद पशु अस्पताल तक नहीं है। पशु पालक बलराम सिंह कहते हैं कि बीमार होने पर पशुओं को चार किमी दूर लोधा के अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। अगर गांव में ही किसी पशु चिकित्सक को बुलाएं तो 500 से हजार रुपये तक ठंडे हो जाते हैं।
छह किमी दूर है इंटर कॉलेज
गांव में आठवीं तक का सरकारी स्कूल है, इसके बाद की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को छह किमी दूर नादा पुल की ओर आना पड़ता है। उन्हें जीटी रोड का फोरलेन हाईवे पार करना होता है, जिस पर भारी वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं। इससे अभिभावक चिंतित रहते हैं। बरसात में विद्यार्थी कॉलेज नहीं जा पाते, उनकी पढ़ाई ढंग से नहीं हो पाती है। भावना, भूमि, वर्षा, कीर्ति, दिव्यांशी, गुंजन, डॉली, रमा, शिवानी और संगीता उच्च शिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं, लेकिन इंटर और डिग्री कॉलेज तक पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती है। हीतेश, दीपांशु और अभी भी इससे जूझ रहे हैं।
श्मशान गृह तक नहीं
दशकों पुराना गांव होने के बाद भी अगर बरसात के समय किसी का निधन हो जाए तो बिना तिरपाल लगाए बिना अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाता है। अब तक यहां पर श्मशान गृह तक नहीं बन पाया है। ग्राम पंचायत की कीमती जमीनों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं।
थाना बना तो खुल गया ठेका
गांव के पास ही रोरावर थाना बनने के बाद यहां देसी शराब का ठेका खुल गया है। महिलाएं कहतीं हैं कि ठेका खुलने के बाद गांव के लोग शराब में पैसा बर्बाद कर देते हैं। जब तक थाना नहीं बना था, तब तक ठेका यहां से दूर था, इसलिए लोगों को आसानी से शराब नहीं मिल पाती थी। ठेका इस गांव से दूर कर दिया जाए।
पाइपलाइन बिछी, नल सूखे
यहां के घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक टंकी नहीं बन पाई है जिससे ग्रामीणों को हैंडपंप या सबमर्सिबल पंप का सहारा लेना पड़ता है। टंकी कब तक बनेगी, इसका कोई समय तय नहीं है।
इनको मिल रहा है लाभ
लोधा ब्लॉक के डीपीओ ने बताया कि गांव में किसान सम्मान निधि के लाभार्थी 269 हैं। 25 लोगों को दिव्यांग, 73 को विधवा और 31 को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 25 स्वयं सहायता समूह हैं, 275 महिलाएं इनसे जुड़ी हैं। यह महिलाएं पशु पालन सहित अन्य काम करती हैं।