पिछले दिनों नगर निगम बोर्ड बैठक में भाजपा पार्षदों ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने पिछली बैठक में रखे गए प्रस्ताव की स्थिति पूछी थी। इस पर मेयर प्रशांत सिंघल ने जवाब दिया कि प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब शासन ने उसी प्रस्ताव के संबंध में कुछ और जानकारियां मांगी हैं।
अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ करने के प्रस्ताव पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छिड़ गई है। लोग इसके पक्ष और विपक्ष में अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले दिनों नगर निगम बोर्ड बैठक में भाजपा पार्षदों ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने पिछली बैठक में रखे गए प्रस्ताव की स्थिति पूछी थी। इस पर मेयर प्रशांत सिंघल ने जवाब दिया कि प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब शासन ने उसी प्रस्ताव के संबंध में कुछ और जानकारियां मांगी हैं। इसके बाद से ही विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।यह प्रस्ताव शहर में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। नाम बदलने को लेकर कई बार मांग उठ चुकी है। जिला पंचायत स्तर से भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसको लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।
विज्ञापन
किसी को नहीं होनी चाहिए आपत्ति
इस्लामिक विद्वान मुफ्ती वजाहत कासमी ने इंस प्रस्ताव पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि भारत सनातन की भूमि है। इसलिए, अलीगढ़ या हरिगढ़ नाम पर लोगों को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मुफ्ती कासमी ने यह भी कहा कि एनडीए सरकार, विशेषकर योगी जी की सरकार, इतिहास पर बहुत ध्यान दे रही है।
मुद्दों से ध्यान भटका रही सरकार
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ बहुत पुराना नाम है और यह सदियों से चला आ रहा है। मौलाना रशीदी के अनुसार, सरकार महंगाई, बेरोजगारी या शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम नहीं कर पा रही है। उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान स्कूलों को बंद करने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
क्या नाम बदलने से होगा विकास : बसपा
बसपा जिलाध्यक्ष एडवोकेट सुरेश गौतम ने सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने से सभी समस्याओं का हल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी मांग करती है कि अलीगढ़ की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का पूरा विवरण जनता के सामने रखा जाए। बताया जाए कि कितना पैसा आया, कहां खर्च हुआ और कौन से काम हुए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।