बिल्ला बनाने के लिए पहले डिजाइन के अनुसार ढलाई के लिए डाई तैयार की जाती है। डिजाइन की ढलाई हो जाने के बाद धुलाई, घिसाई और पॉलिश की जाती है। अंत में पैकिंग होती है और माल सप्लाई के लिए तैयार हो जाता है। प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग कारीगर होते हैं।
चुनौती भी कम नहीं
पुलिस की वर्दी के लिए बिल्ले, स्टार और मोनोग्राम तैयार कर रहे सुधांशु मिश्रा बताते हैं कि इस काम में चुनौतियां कम नहीं हैं। बिल्ले की डिजाइन तैयार करना बहुत बारीक काम होता है। इसलिए तैयार बिल्लों की घिसाई, पॉलिश, चमक आदि कई स्तर पर चेकिंग की जाती है। किसी भी स्तर पर खराब होने पर माल विदेश में नहीं भेजा जाता। इस तरह लेबर का खर्च बढ़ जाता है।
हथकड़ियां बनाने से शुरू किया सफर बिल्ला बनाने तक पहुंचा
सराय मानसिंह इलाके में स्वतंत्रता सेनानी सोनपाल मिश्रा ने 1932 में हथकड़ी बनाना शुरू किया था। धीरे-धीरे हथकड़ी की डिजाइन बदली और वजन भी कम हुआ। अब तक हथकड़ियों की चार डिजाइन तैयार हो चुकी हैं। भारत के सभी राज्यों के साथ दुनिया के करीब 35 देशों में हथकड़ी निर्यात की जाती हैं। सोनपाल मिश्रा की तीसरी पीढ़ी के हिमांशु मिश्रा और उनके भाई सुधांशु मिश्रा यह कारोबार संभाल रहे हैं। इन भाइयों ने ही अब पुलिस के बिल्ला बनाने का काम शुरू किया है।