अगस्त में परीक्षा देकर निकले छात्र पर हमला व फायरिंग मामले में जो सवाल अमर उजाला ने उठाया था, उस पुलिस ने भी मुहर लगा दी है। पुलिस का एक पत्र प्रॉक्टर कार्यालय पहुंचा है, जिसमें पूछा गया है कि आखिर आपके स्तर से उन 18 सुझावों पर क्या किया गया। अगर उन पर अमल किया तो फिर यह घटना कैसे हो गई। क्यों सख्ती नहीं की गई। साथ ही, एएमयू से पूछा है कि जरूरत पर एएमयू में पुलिस चेकिंग का क्या प्रावधान है। इसे लेकर क्या हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई प्रावधान है, जिसमें भीतर पुलिस विशेष चेकिंग के लिए प्रवेश कर सकती है या एएमयू का अपना कोई संविधान है। इससे भी अवगत कराया जाए।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में आपराधिक गतिविधियों से नाता नया नहीं है। अक्सर एएमयू में अपराधियों के छिपे होने और छात्र गुटों के बीच झगड़े में फायरिंग की घटनाएं होती रहती हैं। इन्हीं घटनाक्रमों को लेकर जून में पुलिस की ओर से एएमयू इंतजामिया को 18 सुझाव सुरक्षा के बिंदु पर भेजे थे। इसके बाद 6/7 अगस्त को फिर कैंपस के अंदर आपराधिक घटना हो गई, जिसमें परीक्षा देकर निकले छात्रों के बैग से पिस्तौल तक निकली। ऐसे में सवाल खड़ा हुआ कि पुलिस के उन सुझावों पर क्या हुआ? पिस्तौल कैसे पहुंची? सूत्रों के अनुसार इसे लेकर अब पुलिस की ओर से फिर प्रॉक्टर को चिट्ठी भेजी है, जिसमें पूछा है कि आखिर पूर्व में भेजे गए 18 सुझावों पर क्या हुआ। अगर हुआ तो फिर यह घटना कैसे हो गई।
- पुलिस की ओर से फिर एक पत्र प्राप्त हुआ है। अभी उस पत्र का अध्ययन नहीं हुआ है। अध्ययन करने के बाद ही यह कहा जा सकेगा कि उसमें क्या उल्लेख है और क्या पूछा गया है। उसके बाद उसका जवाब भी दिया जाएगा।-प्रो.वसीम अली, प्रॉक्टर एएमयू