पुलिस कभी कभी कैसे-कैसे कारनामे कर देती है, जिसे सुनकर कोई भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर होता है। ऐसा ही ताजा वाकया अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके में सामने आया है। यहां क्वार्सी थाने के निवर्तमान इंस्पेक्टर हत्या के एक ऐसे आरोपी के खिलाफ चार्जशीट देकर चले गए, जिसकी मौत पर खुद क्वार्सी पुलिस ने ही पंचायतनामा भर पोस्टमार्टम कराया था।
यानी कि पुलिस को भलीभांति मालूम था कि आरोपी की मौत हो चुकी है। वह तो गनीमत कि चार्जशीट जब सीओ के सामने पहुंची तो वह हैरान रह गए। तत्काल मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। चार्जशीट को वापस भेजा गया। वहीं एसएसपी ने मामले में क्वार्सी के निवर्तमान इंस्पेक्टर के खिलाफ इस लापरवाही पर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
यह घटनाक्रम 13 फरवरी का है, जब क्वार्सी के महेशपुर से सटे गांव बरहेती निवासी युवती कुमकुम की उसके घेर में घुसकर गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का आरोप उसके प्रेमी गांव निवासी संजय पर लगा। वजह स्पष्ट हुई कि दोनों में प्रेम संबंध थे और कुमकुम की परिवार वालों ने शादी दूसरी जगह तय कर दी। इसी 8 मार्च को शादी भी होनी थी।
इसी बात से आहत होकर संजय ने उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं अगले दिन यानि 14 फरवरी को गांव के बाहर खेतों में खुद फांसी लगाकर जान दे दी। दौरान-ए-जांच साफ हुआ कि दोनों मंदिर में शादी कर चुके थे। भागने की तैयारी में थे। मगर सफल न होने पर संजय ने यह कदम उठा लिया। इस मामले में मृत संजय के खिलाफ 302 यानी हत्या का मुकदमा युवती के पिता की ओर से दर्ज कराया गया।
चूंकि नियमानुसार इस तरह के मुकदमों में पुलिस एफआर यानी अंतिम रिपोर्ट भेजती है, जिसमें आरोपी की मृत्यु होने का हवाला देकर मुकदमे में एफआर लगाई जाती है। मगर यहां विवेचक तत्कालीन इंस्पेक्टर क्वार्सी डीएस त्यागी चार्जशीट लगा गए।
यानी मुकदमा चलाने के लिए आरोप पत्र दे दिया। चार्जशीट जब सीओ के समक्ष पहुंची तो उन्होंने इसे वापस कर दिया और प्रकरण एसएसपी के समक्ष रखा गया। सीओ के अनुसार मुकदमे में नए विवेचक से एफआर लगवाई जा रही है और उनकी रिपोर्ट पर एसएसपी द्वारा इंस्पेक्टर डीएस त्यागी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।