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पुलिस ने पांच साल में झूठे पाए अनुसूचित उत्पीड़न के 230 मुकदमे

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जिले में पिछले पांच वर्ष में अनुसूचित उत्पीड़न के 230 मुकदमे झूठे दर्ज कराए गए या साक्ष्यों के अभाव में दम तोड़ गए। ये पुलिस ने विवेचना के स्तर पर माना है और इन 230 मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है। यह खुलासा खुद पुलिस द्वारा दिए गए आरटीआई के एक जवाब में हुआ है।
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भ्रष्टाचार विरोधी सेना के पंडित केशव देव की ओर से जिला पुलिस से आरटीआई में यह जानकारी मांगी कि पिछले पांच वर्ष में अनुसूचित उत्पीड़न के कितने मुकदमे दर्ज हुए और उनमें क्या कार्रवाई की गई। इस पर पुलिस ने वर्ष वार पांच वर्ष का ब्योरा जवाब में भेजा है, जिसमें वर्ष 2022 में अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक का ब्योरा दिया गया है। पांच वर्ष में कुल 1090 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें से 829 में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, जबकि साक्ष्यों की कमी या झूठे पाए जाने पर 230 मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट दी गई है। इस पर खुद केशव देव ने कहा है कि यह रिकार्ड बताता है कि लोग मुआवजे के फेर में अक्सर झूठे मुकदमे दर्ज करा देते हैं। इस तरह गलत मुकदमे दर्ज कराने वालों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। ताकि इन पर अंकुश लग सके।
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-ये है तस्वीर-
वर्ष दर्ज मुकदमे आरोप पत्र अंतिम रिपोर्ट
2017 137 99 38
2018 174 126 48
2019 169 123 46
2020 186 152 34
2021 216 176 39
2022 208 153 25
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