खैर के पैंठ मैदान की बेशकीमती जमीन का विवाद तो शांत हो गया है। मगर, अब इसमें पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की गर्दन फंस गई है। बहादुरगंज के एक व्यक्ति ने अधिवक्ता के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे के आदेश के लिए याचिका दाखिल की थी। इस याचिका के आधार पर सीजेएम कोर्ट से सभी तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच के आदेश डीएम को दिए गए हैं। डीएम ने एडीएम प्रशासन को इस मामले की जांच सौंपी है। एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी।
बहादुरगंज निवासी इनाम पुत्र इस्लाम निवासी मो. बहादुरगंज, खैर ने तत्कालीन एसडीएम खैर अंजुम बी, पुलिस क्षेत्राधिकारी संजीव कुमार दीक्षित, तहसीलदार रेशम व इंस्पेक्टर शंभूनाथ के खिलाफ याचिका में आरोप लगाया है कि 15 जुलाई 2020 को ये सभी अधिकारी पुलिस बल और गुंडों को साथ लेकर आए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्थगन आदेश होने के बाद भी खैर मैदान में बनीं दुकानों, खोखों में जेसीबी से तोड़फोड़ कर करोड़ों रुपयों की क्षति पहुंचाई एवं सामान को लुटवा दिया गया। घटना स्थल पर ही स्थगन आदेश की प्रति फाड़ दी गई। फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। थाने पर रिपोर्ट लिखाने पहुंचे तो वहां से भगा दिया गया। एसएसपी अलीगढ़ को शिकायती पत्र भेजा तो वहां भी सुनवाई नहीं हुई। इन सभी आरोपों के तहत इनाम की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के आदेश की गुजारिश की गई।
याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने राजेंद्र सिंह बनाम चंडीगढ़ प्रशासन व ललिता कुमारी बनाम उप्र राज्य एवं अन्य के फैसले को नजीर मानते हुए घटना की सत्यता परखने के लिए मुकदमे से पहले प्रारंभिक जांच कराने के आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर जांच कराकर रिपोर्ट दें। इस मामले की जांच डीएम ने एडीएम प्रशासन देवी प्रसाद पाल को सौंप दी है। डीएम के मुताबिक जांच रिपोर्ट जल्द कोर्ट में पेश की जाएगी।
एक सप्ताह चला था ड्रामा
खैर के पैंठ मैदान की जमीन को 15 जुलाई को प्रशासन ने खोखे, दुकान वालों से खाली करा दिया था। जमीन को अपनी बता रहे कुछ लोगों को कब्जा दिला दिया गया था। उन लोगों ने रातोंरात जमीन पर बाउंड्रीवाल करवा दी। इसके बाद जैसे ही मामले ने तूल पकड़ा। प्रशासन पलट गया। रातोंरात प्रशासन ने जेसीबी लगवाकर दो घंटे के अंदर चारदीवारी गिरवा दी और उन लोगों से भी जमीन को खाली करा लिया।
साथ ही दीवार बनवाने वाले सात लोगों समेत खैर के सेवानिवृत्त कानूनगो पर एफआईआर दर्ज कराई गई। कहा गया कि लेखपाल प्रेम प्रकाश गुप्ता ने अधिकारियों को गलत रिपोर्ट पेश की, जिसके चलते जमीन खाली कराने के बाद उन लोगों को दी गई। बाद में लेखपाल प्रेम प्रकाश गुप्ता को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही जमीन पर बैनर टांगा गया, जिसके अनुसार पैंठ की यह जमीन नगर पालिका को सौंप दी गई।
मुकदमा खैर थाने में पालिका ईओ संदीप सक्सेना ने सरकारी भूमि पर अवैध चारदीवारी निर्माण का आरोप लगाते हुए इकबाल पुत्र इस्लाम खां, मोहम्मद यूसुफ पुत्र भूरा खां, गंगाप्रसाद पुत्र सुखपाल गर्ग, आस मोहम्मद व चांद खां पुत्रगण बाबू खां, कमरुद्दीन पुत्र मोहम्मद सफी, प्रकाश चंद पुत्र हुकुम सिंह निवासी गौमत के खिलाफ विभिन्न धाराओं में कराया था।