जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमले और लगातार दो दिन से आसमान पर ड्रोन दिखाई देने के मामले के बाद अलीगढ़ में पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक रूप से तो कोई आदेश नहीं मिला है, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए अलीगढ़ के संवेदनशील सरकारी संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। अलीगढ़ में 50 से अधिक हल्के ड्रोन के होने की बात कही जा रही है। इनका उपयोग अधिकांशत: शादी समारोह की वीडियोग्राफी में होता है। अभी इन सब को चिन्हित करके सूची बनाए जाने का काम किए जाने की जानकारी मिल रही है।
इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों से जब बात की गई तो उन्होंने खुलकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया लेकिन अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार जरूर किया कि बदलती स्थितियों को ध्यान में रखते हुए वह हालात पर नजर रखे हैं।
ये हैं अलीगढ़ के संवेदनशील क्षेत्र
जिला मुख्यालय, पुलिस लाइन, पुलिस शस्त्रागार, पीएसी बटालियन, कोषागार, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, रैपिड एक्शन फोर्स बटालियन, मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र, जिला कारागार आदि।
इसी वर्ष बनाए गए हैं नियम
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व विधि छात्र और वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट में अधिवक्ता फहद खान कहते हैं कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन के बढ़ रहे खतरे को ध्यान में रखते हुए इसी साल कुछ नियम लागू किए थे। इसमें 250 ग्राम से ज्यादा वजन के ड्रोन उड़ाने को लेकर नए नियम लागू हैं। इससे ज्यादा वजन के ड्रोन को बिना अनुमति उड़ाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सर्टिफिकेट लेना आवश्यक होगा। नए नियमों के मुताबिक अब 250 ग्राम से ज्यादा वजन के ड्रोन उड़ाने के लिए कम से कम 18 साल उम्र होनी चाहिए। 10वीं तक की पढ़ाई, मेडिकल सर्टिफिकेट और सरकारी एग्जाम पास करना आवश्यक होगा। बिना ट्रेनिंग और लाइसेंस के ड्रोन उड़ाने पर अब 25 हजार रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब ड्रोन उड़ाने, ड्रोन बनाने, ड्रोन की खरीद-बिक्त्रस्ी के लिए मंजूरी लेनी आवश्यक है। ये नियम 12 मार्च 2021 से लागू कर दिए गए हैं।
धनीपुर मिनी एयरपोर्ट में ड्रोन का प्रशिक्षण फिलहाल नहीं
धनीपुर मिनी एयरपोर्ट पर संचालित एंबीशन फ्लाइंग क्लब के एमडी विशाल गर्ग ने बताया कि उनके क्लब को डायरेक्टर ऑफ सिविल एविएशन के पास ड्रोन प्रशिक्षण शुरू करने का प्रस्ताव लंबित है। अभी तक अनुमति नहीं मिली है। कोरोना काल में ये काम रुका है। इस प्रशिक्षण में कितनी फीस ली जाएगी..? कितने दिनों का प्रशिक्षण होगा..? प्रशिक्षण मिनी एयरपोर्ट परिसर से कितनी दूर होगा। एक बैच में कितने बच्चे शामिल होंगे। प्रशिक्षण कोर्स का डिजाइन फाइनल होना बाकी है। ये सब कुछ फाइनल होने के बाद ही इसका प्रशिक्षण शुरू होगा।
विशाल गर्ग ने बताया कि मिनी एयरपोर्ट में राष्ट्रीय स्तर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लागू होने के बाद यहां पर प्रशिक्षण ले रहे कामर्शियल पायलट का कोर्स करने वाले युवाओं को राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त हो सकेगा। अभी तक स्थानीय स्तर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम चालू था। राष्ट्रीय स्तर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल सीखने से पायलटों को और बेहतर विकल्प मिलेंगे।