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मौत का तांडव मचाने वाले जहरीली शराब कांड: 10 दिन में ही 126 लोगों की गई थी जान, 26 अधिकारी-कर्मचारी दोषी, 15 दिनों में पूरी होने वाली जांच में लगाया 10 महीना

Mon, 04 Apr 2022 01:06 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ जहरीली शराब कांड में लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद है। शासन स्तर पर चल रही जांच में 26 अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। अब इनपर गाज गिरनी तय है। 
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जहरीली शराब - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले वर्ष जिले में मौत का तांडव मचाने वाले जहरीली शराब कांड में 10 दिनों में 126 से अधिक लोगों की मौत हुई। हालांकि, सरकारी आंकड़ों में 106 लोगों के ही पोस्टमार्टम हुए। इस कांड की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने में दस माह लग गए, जबकि यह 15 दिनों में पूरी होनी थी। उस दौरान घटना से प्रदेश भर में हलचल मची रही। अब जाकर आई मजिस्ट्रेटी जांच में आबकारी व पुलिस के उन 26 अधिकारी-कर्मचारियों को दोषी माना है, जिन पर घटना के बाद ही निलंबन व विभागीय जांच का एक्शन हो चुका है। अब यह मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट डीएम स्तर से शासन को भेजी गई है। अब देखने वाली बात है कि शासन से किन-किन पर इसकी गाज गिरती है।
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85 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया
28 मई 2021 की सुबह लोधा क्षेत्र के गांव करसुआ में जहरीली शराब पीने से मरने वालों का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद खैर क्षेत्र के गांव अंडला, फतेहपुर, लोधा के रायट, गभाना के पचपेड़ा, सांगौर, नंदपुर पला, जवां के छेरत, हैबतपुर, पिसावा के दीवा हमीदपुर आदि गांवों में भी जहरीली शराब के सेवन से मौत होने का सिलसिला लगातार 10 दिनों तक जारी रहा। अलीगढ़ शहर में भी कई लोगों की शराब पीने से मौत हो गई। मरने वालों की संख्या 126 से अधिक रही। जिनमें से केवल 106 लोगों का ही पोस्टमार्टम हो सका। इस प्रकरण में विभिन्न थानों में करीब 33 मुकदमों में 85 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और उनकी करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है। मुकदमों में चार्जशीट के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू हो चुका है। डीएम स्तर से जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब दोषियों पर कार्रवाई का निर्णय वहीं से होना है।

प्रदेश में मची रही हलचल
पिछले वर्ष जिले में मौत का तांडव मचाने वाले जहरीली शराब कांड में 10 दिनों में 126 से अधिक लोगों की मौत हुई। हालांकि, सरकारी आंकड़ों में 106 लोगों के ही पोस्टमार्टम हुए। इस कांड की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने में दस माह लग गए, जबकि यह 15 दिनों में पूरी होनी थी। उस दौरान घटना से प्रदेश भर में हलचल मची रही। अब जाकर आई मजिस्ट्रेटी जांच में आबकारी व पुलिस के उन 26 अधिकारी-कर्मचारियों को दोषी माना है, जिन पर घटना के बाद ही निलंबन व विभागीय जांच का एक्शन हो चुका है। अब यह मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट डीएम स्तर से शासन को भेजी गई है। अब देखने वाली बात है कि शासन से किन-किन पर इसकी गाज गिरती है।
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सिर्फ 106 लोगों का पोस्टमार्टम
28 मई 2021 की सुबह लोधा क्षेत्र के गांव करसुआ में जहरीली शराब पीने से मरने वालों का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद खैर क्षेत्र के गांव अंडला, फतेहपुर, लोधा के रायट, गभाना के पचपेड़ा, सांगौर, नंदपुर पला, जवां के छेरत, हैबतपुर, पिसावा के दीवा हमीदपुर आदि गांवों में भी जहरीली शराब के सेवन से मौत होने का सिलसिला लगातार 10 दिनों तक जारी रहा। अलीगढ़ शहर में भी कई लोगों की शराब पीने से मौत हो गई। मरने वालों की संख्या 126 से अधिक रही। जिनमें से केवल 106 लोगों का ही पोस्टमार्टम हो सका। इस प्रकरण में विभिन्न थानों में करीब 33 मुकदमों में 85 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और उनकी करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है। मुकदमों में चार्जशीट के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू हो चुका है। डीएम स्तर से जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब दोषियों पर कार्रवाई का निर्णय वहीं से होना है।

बयानों के कारण मजिस्ट्रेटी जांच में देरी, मानी गई घोर लापरवाही
इस कांड में तत्कालीन डीएम चंद्रभूषण सिंह ने एडीएम प्रशासन डीपी पाल को 15 दिन में मजिस्ट्रेटी जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे। एडीएम प्रशासन ने जांच शुरू की तो कभी पीड़ितों के तो कभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज कराने में देरी होती गई। इससे जांच भी प्रभावित होने लगी। करीब 10 माह में यह जांच पूरी हो सकी। इस दौरान जांच अधिकारी ने पीड़ित परिजनों, ग्रामीणों, चश्मदीद गवाहों, पुलिस, राजस्व, आबकारी के अधिकारी व कर्मचारियों समेत पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के भी बयान दर्ज किए। एडीएम की जांच में साफ हुआ कि जिले की कुछ शराब की दुकानों पर शराब माफियाओं के स्तर से डिस्टलरी से गुड इवनिंग ब्रांड की देसी शराब के साथ-साथ नकली रैपर, बोतल, बार कोड का उपयोग कर नकली शराब तैयार कराई जा रही थी। इसे एक संगठित गिरोह संचालित कर रहा था।

अधिकारियों ने बरती घोर लापरवाही
एडीएम प्रशासन के अनुसार नकली शराब बनने व उसकी बिक्री करने की संबंधित इलाका पुलिस व आबकारी विभाग के अफसरों व कर्मचारियों के संज्ञान में था। उन्होंने जांच रिपोर्ट में माना कि आबकारी व पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने शासकीय दायित्वों का ईमानदारी से पालन करने की बजाए इसमें घोर लापरवाही बरती है। इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ही दोषी हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी भी की है कि यदि संबंधित अधिकारी इस ओर समय रहते ध्यान देते और कार्रवाई करते तो लोगों की जान बचायी जा सकती थी।

इन्हें माना दोषी
तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा, आबकारी निरीक्षक क्षेत्र अतरौली अवनीश कुमार पांडेय, आबकारी निरीक्षक गभाना चंद्र प्रकाश यादव, आबकारी निरीक्षक लोधा, खैर व टप्पल राजेश कुमार यादव, आबकारी सिपाही रामराज राना, अशोक कुमार, नितेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार शर्मा, योगेंद्र सिंह, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अकराबाद रजत कुमार शर्मा, खैर प्रवेश कुमार, गभाना सुबोध कुमार, टप्पल प्रवीन कुमार मान, थानाध्यक्ष जवां चंचल सिरोही, लोधा अभय कुमार शर्मा, चौकी प्रभारी जट्टारी शक्ति राठी, चौकी प्रभारी जवां अरविंद कुमार, चौकी प्रभारी पनैठी सिद्धार्थ कुमार, मुख्य आरक्षी लोधा उम्मेद सिंह, आरक्षी श्रवण कुमार, आलोक कुमार, घनेंद्र, एहतेशाम खां, अमित कुमार, रोहित कुमार व विक्की शर्मा शामिल हैं। इनमें से कई अधिकारी व कर्मचारियों का गैर जनपदों में स्थानांतरण हो चुका है तो कई अधिकारी अभी भी निलंबित चल रहे हैं।
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