फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना महामारी के चलते शायरों ने भी मंच बदला, मुशायरा हुआ डिजिटल

विज्ञापन
आनलाइन गजल कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र - फोटो : AMAR UJALA
विज्ञापन
अलीगढ़। कोरोना महामारी के चलते बदलते दौर में अब शायरों ने भी अपना मंच बदल लिया है। मुशायरा भी अब डिजिटल प्लेटफार्म पर आ रहा है। एएमयू एलुमनाई ऑफ कतर के संयोजन में 25 जून को 'एक शाम अलीगढ़ के नाम' कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह पूरी तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन होगा और इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संगीतकार और प्रसिद्ध शायर जॉनी फॉस्टर को आमंत्रित किया गया है। एएमयू एलुमनाई आफ कतर द्वारा रवायत को जिंदा रखने के लिए पहली बार ऑनलाइन मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है। जॉनी फॉस्टर ने बताया कि यह कार्यक्रम एसोसिएट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अंडर द एजिज ऑफ एंबेसी ऑफ इंडिया के संरक्षण में किया जा रहा है। संस्था के अध्यक्ष जावेद अहमद, उपाध्यक्ष मोहम्मद फैसल नसीम और महासचिव मोहम्मद फरहान खान को इस आयोजन का श्रेय जाता है। इस आयोजन के संयोजक यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर जावेद उल हक हैं। जॉनी फास्टर के मुताबिक यह बदलते समय के अनुरूप की गई व्यवस्था है। भले ही इसमें शमा रोशन न हो। लेकिन जज्बे की शमा हर शायर की और हर सुनने वाले के दिल में रोशन रहेगी। गजलकार सुरेश कुमार कहते हैं कि वक्त के साथ माध्यम बदल सकते हैं लेकिन सृजन में मूल तत्व की प्रधानता बनी रहती है। शायर मंच पर शेर पढे़ या डिजिटल प्लेटफार्म पर, शेर वजनदार होगा तो अपना असर जरूर छोड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें