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नियमों के दायरे में आएंगे बिना मान्यता के चल रहे प्ले स्कूल

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डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय । बीएसए - फोटो : CITY OFFICE
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जिले में सैकड़ों की संख्या में चल रहीं प्री प्राइमरी कक्षाएं (प्ले स्कूल) जल्द ही मान्यता के दायरे में लाई जाएंगी। साथ ही इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुविधाओं और सुरक्षा के मानक भी तय किए जाएंगे। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग के पास इन प्ले स्कूलों का कोई रिकार्ड नहीं है। वहीं, कई प्ले स्कूल तो घरों से ही संचालित हो रहे हैं। एक या दो कमरों को प्ले स्कूल का दर्जा देकर बच्चों को औपचारिक शिक्षा दी जा रही है।
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बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं के मान्यता के नियम तय किए जा रहे हैं। अभी तक छह वर्ष की उम्र में बच्चों को कक्षा एक में औपचारिक शिक्षा के तहत पढ़ाने का प्रावधान है। ऐसे में प्री प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को रिपोर्ट कार्ड अथवा अन्य कोई दस्तावेज जारी नहीं होता है। कुछ अभिभावक इन दस्तावेजों के लिए स्कूल में हंगामा भी करते हैं। मान्यता के दायरे में आने से संबंधित दस्तावेज जारी हो सकेंगे। मान्यता से सुविधाओं और सुरक्षा के मानक तय होंगे। सभी स्कूल अब समान पाठ्यक्रम से संचालित होंगे। इससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।
आंगनबाड़ी केंद्र प्ले स्कूल में होंगे तब्दील
नई शिक्षा नीति के तहत तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूलों में तब्दील किया जाएगा। औपचारिक शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें यूनिसेफ भी मदद करेगा। हाल ही में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने अप्रैल 2021 से इस व्यवस्था को लागू करने की बात कही थी।
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- 2010 से लिटिल हार्ट प्री स्कूल चला रही हूं। मान्यता के नियम सरकार तय कर रही है, यह अच्छा कदम है। इससे उन स्कूलों पर नकेल कसी जा सकेगी, जो मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। मान्यता जारी होने से हमें काफी सहूलियत होने वाली है। अब बच्चों के कागजात तैयार कर सकेंगे। - पुष्पांजलि सिंह, प्रिंसिपल लिटिल हार्ट प्री स्कूल।
- अभी तक विभाग के पास शहर में प्री प्राइमरी स्कूलों का कोई आंकड़ा नहीं है। शासन से कोई आदेश अभी नहीं आया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही हम मान्यता की प्रक्रिया को अमल में लाएंगे। लेकिन यह बात भी सही है कि अनगिनत प्ले स्कूल मानकों के बिना चल रहे हैं। कहीं-कहीं बिना सुविधाओं के मनमानी फीस वसूली जा रही है। एक या दो कमरे में प्ले स्कूल चलाए जा रहे हैं। मान्यता के दायरे में आने से स्थिति में काफी सुधार आएगा। - डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए।
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