पौधरोपण कागजों पर नहीं, वास्तविकता में होना चाहिए। जब तक पौधों को ट्री गार्ड या सुरक्षित चहारदीवारी के अंदर नहीं लगाया जाएगा, तब तक पौधरोपण अभियान की यही स्थिति रहेगी। निजी भागीदारी व जिम्मेदारी तय करने से अच्छे परिणाम मिलेंगे।- सुबोध नंदन, पर्यावरणविद्
इस बार वार्षिक पौधों की प्रजाति के हिसाब से भूमि का चयन किया गया है, जो पौधा जैसी भूमि पर वृद्धि करता है उसी हिसाब से पौधरोपण किया गया है। वर्षाकाल में पौधरोपण करने के पीछे भी यही वजह है कि पानी के अभाव में पौधे सूखे नहीं। डेढ़ से दो माह तक बारिश के पानी से पौधे की जड़ बढ़नी शुरू हो जाती है। पौधरोपण के साथ ही संबंधित विभागों को उनकी देखरेख करने का जिम्मा सौंपा गया है। पौधों की जिओ टैगिंग भी की जा रही है।- रजनीकांत मित्तल, प्रभागीय वन अधिकारी।
ये है पौधरोपण का दावा
वन विभाग ने 832844, पर्यावरण विभाग ने 221000, ग्राम्य विकास ने 2217521, राजस्व विभाग ने 165000, पंचायतीराज ने 200000, आवास विकास विभाग ने 8000, औद्योगिक विकास ने 10000, नगर विकास ने 31000, लोक निर्माण ने 17000, सिंचाई/जल शक्ति विभाग ने 18000, कृषि विभाग ने 425000, पशुपालन विभाग ने 9000, सहकारिता विभाग ने 8680, उद्योग विभाग ने 13000, विद्युत/ऊर्जा विभाग ने 6720, शिक्षा विभाग (अ) माध्यमिक शिक्षा ने 12000, (ब) बेसिक शिक्षा विभाग ने 20000, (स) प्राविधिक शिक्षा विभाग ने 7000, (द) उच्च शिक्षा विभाग ने 26000, श्रम विभाग ने 4300, स्वास्थ्य विभाग ने 13000, परिवहन विभाग ने 5550, रेलवे ने 14000, रक्षा विभाग ले 5000, उद्यान विभाग ने 243000, पुलिस/गृह विभाग ने 11800 समेत कुल 44,28,290 पौधे रोपने का दावा किया गया है।
जिले में इस तरह वर्षवार हुआ पौधरोपण
वर्ष, कुल पौधारोपण
- 2020-21, 30.33 लाख
- 2021-22, 36.7 लाख
- 2022- 23, 45.98 लाख
- 2023-24, 46.46 लाख
- 2024-25 44.28 लाख