याचिका क्षत्रिय महासभा के संरक्षक राजेश चौहान की ओर से दायर की गई है। जिसमें आरो है कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने सदन में 21 मार्च को बाबर व राणा सांगा से जोड़ कर विवादित बयान दिया है। इससे समूचा क्षत्रिय समाज आहत है।
सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के विवादित बयान पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर याचिका पर 11 अप्रैल को सुनवाई हुई। जिसमें वादी के बयान अदालत में दर्ज कराए गए। अब अदालत ने मामले में 18 अप्रैल तारीख नियत की है। जिसमें वादी पक्ष को अन्य साक्ष्य पेश करने का समय दिया गया है।
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यह याचिका अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के संरक्षक राजेश चौहान की ओर से अधिवक्ता सतीश कुमार सिंह द्वारा दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने सदन में 21 मार्च को बाबर व राणा सांगा से जोड़ कर विवादित बयान दिया है। इससे समूचा क्षत्रिय समाज आहत है। याचिका में सपा सांसद पर मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया गया।
इसी क्रम में 11 अप्रैल को सुनवाई की नियत तारीख पर वादी राजेश चौहान के बयान हुए। जिसमें उन्होंने कहा कि इस बयान के लिए सपा सांसद ने बाबरनामा को आधार बनाया है, मगर वह भी गलत है। एसवी काॅलेज के इतिहास विभाग के प्रो.विवेक सिंह सेंगर ने तथ्य संग्रहित किए हैं। उन्हें पढ़कर साफ होता है कि सांसद ने इतिहास नहीं पढ़ा।
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बयान दर्ज करने की प्रक्रिया के बाद अदालत ने अब साक्ष्य पेश करने के लिए अगली तारीख नियत कर दी है। इस मौके पर एडवोकेट सतीश कुमार सिंह, गोपाल सिंह राणा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, तेजवीर सिंह चौहान, विकास राजपूत आदि साथ रहे।