कौशल कुमार ओझा
कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। जिले में 117 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) तैयार किया जा रहा है। लेकिन काम की रफ्तार बेहद सुस्त है। अभी तक 50 प्रतिशत भी काम पूरा नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग को बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा डॉक्टर, स्टाफ व अन्य संसाधन जुटाना भी चुनौतीपूर्ण होगा। वर्तमान में दीनदयाल अस्पताल में दो, जिला अस्पताल में एक, सीएमओ के अधीन चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। हालांकि, महकमा दावा कर रहा है कि आउटसोर्स के जरिये स्टाफ जुटा लेंगे।
देश में सितंबर-अक्तूबर 2021 तक कोरोना की तीसरी लहर आने का अंदेशा जताया जा रहा है। आशंका है कि इस लहर से सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। इसके मद्देनजर शासन-प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने में जुटे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय एवं मलखान सिंह जिला अस्पताल में क्रमश: 50, 47 और 20 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) तैयार किया जा रहा है। जेएन मेडिकल कॉलेज और पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में करीब 50 प्रतिशत तक काम पूरा हुआ है। दीनदयाल अस्पताल में ऑक्सीजन पाइप लाइन एवं बिजली सहित अन्य कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मलखान सिंह जिला अस्पताल में ग्राउंड पर काम होना बाकी है। जरूरी चीजों से संबंधित प्रस्ताव प्रशासन के पास भेजा गया है। इसके अतिरिक्त शहर के तीन निजी अस्पताल में भी पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार किए जा रहे हैं।
बच्चों का मन बहलाने का भी इंतजाम
इन वार्डों में भर्ती होने वाले बच्चे परेशान न हों और उनका मन लगा रहे, इसका भी ख्याल रखा जाएगा। दीवारों, दरवाजों एवं खिड़कियों पर रंगीन पर्दे, कार्टून कैरक्टर्स आदि बनाए जाएंगे। खिलौनों आदि के इंतजाम पर भी विचार किया जा रहा है। जल्द रिकवरी के लिए अच्छा माहौल देने का प्रयास किया जाएगा। माता-पिता एवं अभिभावकों के लिए रैन बसेरा या अस्पताल में खाली बेड की व्यवस्था की जाएगी।
विशेषज्ञ डॉक्टर एवं समर्पित स्टाफ जुटाना चुनौती
विशेषज्ञ डॉक्टर एवं समर्पित स्टाफ का चयन सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरी लहर में पर्याप्त देखरेख के अभाव में बहुत लोगों की जान गई थी। बार-बार शिकायतें सामने आ रही थीं कि डॉक्टर एवं स्टाफ संक्रमित मरीजों के पास जाने से कतराते हैं या जाते ही नहीं है। देखभाल के बदले पैसे मांगने की शिकायत भी सामने आई थी। कई स्वास्थ्यकर्मी स्वयं संक्रमित होने के डर से भी मरीजों से दूर भागते थे। ऐसे में हालात में बच्चों का इलाज कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है। पीकू वार्ड में एक दिन से लेकर 18 साल तक के बच्चे होंगे। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे एवं 10 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर है। आईसीयू में बच्चों की देखभाल बड़ी चुनौती है। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टर व समर्पित भाव से काम करने वाले स्टाफ की जरूरत होगी।
एक शिफ्ट में चार डॉक्टर और 12 नर्स की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग पहले से ही डॉक्टर एवं स्टाफ की कमी है। दीनदयाल अस्पताल में दो, जिला अस्पताल में एक, सीएमओ के अधीन चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। दीनदयाल अस्पताल के 47 बेड के पीकू वार्ड में मानक के अनुसार, एक शिफ्ट में कम से कम चार डॉक्टर (एक पीडियाट्रिक, एक एनेस्थेटिक एवं दो मेडिकल ऑफिसर) चाहिए। साथ ही कम से कम 12 स्टाफ नर्स के अतिरिक्त वार्ड ब्वाय एवं सफाईकर्मी की जरूरत होगी। यानी एक शिफ्ट में 4 डॉक्टर एवं 12 नर्स चाहिए। ऐसे में 24 घंटे की तीन शिफ्ट में 12 डॉक्टर एवं 36 स्टाफ नर्स की जरूरत होगी। लगातार 15 दिन ड्यूटी के बाद पूरी टीम बदल दी जाती है। दूसरी टीम में भी इतने ही दक्ष एवं अनुभवी स्वास्थ्यकर्मी चाहिए। इसके अतिरिक्त फिजियोथेरेपिस्ट, एक्सरे टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन एवं नर्सिंग सुपरवाइजर आदि की भी जरूरत पड़ेगी।
आउटसोर्स से रखेंगे स्वास्थ्यकर्मी
पीडियाट्रिक आईसीयू की युद्धस्तर पर तैयारी चल रही है। अगर आज मरीज आ जाएं तो हम भर्ती करने के लिए तैयार हैं। अभी हमारे पास स्टाफ है। बालरोग विशेषज्ञों की जरूरत पड़ेगी। आउटसोर्स से स्वास्थ्यकर्मी रखेंगे। बच्चों को यह न लगे कि अस्पताल में हैं, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। मन बहलाने के लिए दीवारों पर कार्टून कैरेक्टर, बलून एवं कलर आदि का ध्यान रखा जाएगा। अभिभावकों के लिए रैन बसेरा एवं वार्ड में व्यवस्था रखेंगे।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
बेड की स्थिति
जेएन मेडिकल कॉलेज- 50
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय - 47
मलखान सिंह जिला अस्पताल - 20
पीकू में ये रहेगा इंतजाम...
प्रशिक्षित डॉक्टर, स्टाफ, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, इंलुजन पंप, ईसीजी, बेड साइट एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि।