दोपहर के 1.05 बजे बंद था चिकित्सक के कक्ष का दरवाजा, बाहर खड़े थे मरीज
ओपीडी में कमरा नंबर-7 का दरवाजा दोपहर 1:05 बजे बंद था। अंदर डॉक्टर थे। दूरदराज क्षेत्र से आए मरीज आधे घंटे से दरवाजा खुलने का इंतजार कर रहे थे। दरवाजे के सामने बैठे मरीज जब इंतजार करते-करते थक गए, तो दरवाजे के सामने खड़े हो गए। दरवाजा खुलने का इंतजार किया, लेकिन नहीं खुला। इसमें कई मरीज ऐसे थे जो भूख के मारे बेचैन हो रहे थे। सबसे ज्यादा दिक्कत शुगर के मरीजों को हो रही थी।
केस-2
सुबह 10 बजे आया मरीज, कक्ष का दरवाजा 1.15 पर खुला
शहर के राठी नगर से आए मरीज अनिल कुमार सक्सेना से नहीं रहा गया तो उन्होंने दरवाजा खटकाया। फिर भी नहीं खुला। अनिल के पैरों में दिक्कत थी। अतरौली क्षेत्र से आए मरीज रामपाल ने बताया कि कई दिनों से पेट में दर्द है। वह 10 बजे से आए हैं, लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं देख रहे हैं, जबकि अन्य मरीजों को देख लिया है। दोपहर 1:15 बजे कमरे का दरवाजा खुला। श्रीकांत शर्मा ने बताया कि वह शुगर के मरीज हैं। शुगर के मरीज ज्यादा देर खाली पेट नहीं रह सकते। लेकिन यहां दो घंटे से दवा का इंतजार कर रहे हैं।
इंतजार करते-करते पर्चा लगाकर पेड़ के नीचे बैठ गए
दोपहर 12 बजे ओपीडी के बाहर पेड़ के नीचे मरीज-तीमारदार बैठे थे। उन्होंने बताया कि डॉक्टर के यहां पर्चा लगा दिया है। वहां पर घर के एक सदस्य मौजूद हैं, जैसे वह बुलाएंगे, वह जाएंगे। अंदर थोड़ी उमस और गर्मी है, इसलिए पेड़ के नीचे बैठे हैं। दोपहर 12:15 बजे कमरा नंबर 124 में बच्चों की भीड़ थी। 83 मरीज पहुंचे, जिनमें ज्यादातर बुखार और वायरल बीमारी से पीड़ित थे। दोपहर 1:20 बजे तक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके शर्मा ने बच्चों को देखा। उन्होंने कहा कि 10 दिन में पहली बार दो बच्चे पीलिया से पीड़ित थे। दोपहर 1:25 बजे तक कमरा नंबर-101 में मरीजों की भीड़ थी। बाकी अन्य कक्ष में दो-चार मरीज थे। दोपहर 1:30 बजे इंद्रा नगर खैर बाईपास की रहने वालीं सुनीता को डॉक्टर ने बाहर की दवाएं लिखीं, जब वह जन औषधि केंद्र पहुंचीं, तो मेडिकल स्टोर संचालक ने दवा होने के लिए मना कर दिया। बाहर से उन्हें दवाएं लेनी पड़ीं।
दो रोटी खाकर आया था। सोचा था जल्दी दवा मिल जाएगी तो घर आकर खाना खा लूंगा। लेकिन यहां तो दो घंटे से भटक रहा हूं। बेचैनी हुई तो समझ गया कि शुगर डाउन हो रही है। बैग में मीठा था जिसे निकालकर खा लिया।-जय प्रकाश गुप्ता
आधे घंटे से कमरा बंद करके डॉक्टर अंदर हैं। बताया गया है कि वह लंच कर रहे हैं। खड़े होने में दिक्कत होती है। कोई सुनने वाला नहीं।-अनिल कुमार, मरीज
सुबह 10 बजे अस्पताल आ गया था। पर्चा लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। मगर एक बजे मेरी बारी नहीं आई। अंदर से दरवाजा बंद था।-रामपाल, मरीज
डॉ. अनिल कुमार की तबीयत खराब थी। हो सकता है कि लंच करने के लिए दरवाजा बंद कर लिया हो। फिर भी उनसे जानकारी करेंगे।-डॉ. एमके माथुर, सीएमएस, डीडीयू