सातवें वेतनमान को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उपचार के लिए पहुंचे एक बच्चे को मृत घोषित किया गया। जबकि पहले से एनआईसी में भर्ती 10 दिन के बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई।
बदायूं, हाथरस सहित अन्य जिलों से आए दर्जनों गंभीर मरीजों को बिना इलाज भेज दिया गया। कुछ को प्राथमिक उपचार देकर वापस कर दिया गया।
जिले के खैर के रहने वाले आठ वर्षीय आकाश को इमरजेंसी में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। आठ जून से एनआईसी में भर्ती 10 दिन के बच्चे की मौत उपचार के दौरान हो गई। शाहजमाल निवासी आसमां ने अस्पताल में ही बच्चे को जन्म दिया था। बच्चा वक्त से पहले पैदा हुआ था और उसका उपचार चल रहा था।
बुलंदशहर के गांव जुलेपरा थाना कोतवाली देहात निवासी दुर्घटनाग्रस्त दिव्यांग टिर्री चालक इमरान को प्राथमिक उपचार के बाद वापस भेज दिया गया। वह जंगलगढ़ी में रहकर टिर्री चलाते हैं। हाथरस पतीगढ़ी निवासी सात वर्षीय शिवा को बिना उपचार वापस भेज दिया गया। वह बागला हास्पिटल से रेफर होकर एंबुलेंस से यहां आए थे।
छत से गिरने की वजह से गंभीर रूप से घायल थे। बदायूं के सहसवान निवासी 45 वर्षीय सईद अहमद पुत्र जिम्मी को बिना उपचार वापस लौटा दिया गया। सईद भी छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल थे। किशनपुर के 60 वर्षीय जगत राम काफी समय तक उपचार के लिए भटकते रहे। वाजितपुर की 30 वर्षीय राधा इमरजेंसी के गेट पर गिर कर पेट दर्द से तड़प रही थीं।
प्राथमिक उपचार देकर उन्हें छोड़ दिया गया। गभाना के गिरधरपुर निवासी 55 वर्षीय उर्मेश लकवा से ग्रसित होकर आई थी। बिना उपचार दिए उन्हें दीनदयाल अस्पताल भेज दिया गया। रामगढ़ पंजीपुर की सात वर्षीय शीतल बिजली करंट से घायल होकर आई थी। बिना उपचार दिए उसे भी वापस भेज दिया गया। इमरजेंसी बाधित होने से दूर-दूर से आने वाले मरीज एवं तीमारदार मारे-मारे फिर रहे हैं।