जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं की खरीद व्यवस्था में बदलाव अब मरीजों के इलाज पर असर डाल सकता है। मेडिकल कॉलेज के हीमोफीलिया केंद्र की नोडल अधिकारी प्रो. जेबा जका उर रब ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर बताया कि प्रशासनिक गतिरोध के कारण जीवनरक्षक दवाओं और जरूरी चिकित्सा सामग्री की समय पर खरीद प्रभावित हुई है। इससे थैलेसीमिया व हीमोफीलिया के 250 से ज्यादा मरीजों का उपचार बाधित हो रहा है। साथ ही समय पर बजट खर्च न होने की वजह से एनएचएम की धनराशि लैप्स भी हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला बीते 30 जुलाई को जारी उस प्रशासनिक पत्र से जुड़ा है, जिसमें एनएचएम से संचालित परियोजनाओं के लिए एक केंद्रीकृत क्रय समिति बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके बाद हीमोफीलिया केंद्र की नोडल अधिकारी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र भेजकर नई व्यवस्था की व्यावहारिक और चिकित्सकीय दिक्कतों के बारे में बताया।
नोडल अधिकारियों को बाहर रखने पर आपत्ति
नोडल अधिकारी के अनुसार अलग-अलग एनएचएम परियोजनाओं की जरूरत और तकनीकी विशिष्टताएं अलग हैं। इन परियोजनाओं के लिए पहले से कुलपति से अनुमोदित अलग-अलग खरीद समितियां काम कर रही हैं। नई प्रस्तावित समिति में संबंधित परियोजनाओं के नोडल अधिकारियों और क्लीनिकल विभागाध्यक्षों को शामिल नहीं किया है। पत्र में थैलेसीमिया का उदाहरण देते हुए कहा है कि मरीजों के नियमित रक्त चढ़ाने की जरूरत को देखते हुए ब्लड बैंक विशेषज्ञों की तकनीकी भूमिका जरूरी है। ऐसे विशेषज्ञ को खरीद व्यवस्था से बाहर रखने से गुणवत्ता नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
समिति की प्रक्रिया में देरी से खरीद पर असर
एनएचएम के तहत कई बार तत्काल खरीद की जरूरत होती है। नई समिति में बाहरी सदस्यों की अनिवार्य मौजूदगी से बैठकें समय पर नहीं हो पा रही जिसके चलते दवाओं की खरीद में देरी की आशंका है। मौजूदा प्रशासनिक गतिरोध से जीवनरक्षक दवाओं और जरूरी चिकित्सा सामग्री की समय पर खरीद प्रभावित हुई है, जिससे मरीजों की नियमित चिकित्सा व्यवस्था बाधित हो रही है।
पुरानी समितियों से खरीद की मांग
नोडल अधिकारी ने मांग की है कि कुलपति से अनुमोदित परियोजना-विशिष्ट समितियों के माध्यम से खरीद की अनुमति दी जाए। इससे एनएचएम की धनराशि समय पर खर्च होगी और मरीजों के लिए जरूरी दवाओं की आपूर्ति बनी रहेगी। उन्होंने समन्वय के लिए जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से अधिकतम एक प्रतिनिधि को समिति में शामिल करने का सुझाव भी दिया है।
आठ अफसरों तक पहुंचा पत्र
नोडल अधिकारी का पत्र एनएचएम के मिशन निदेशक के अलावा अलीगढ़ के मंडलायुक्त, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक, अलीगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिलाधिकारी अविनाश कुमार और एनएचएम के दो अन्य अधिकारियों को भेजा गया है। फाइल कहां अटकी है और किसके फैसले का इंतजार है? इस सवाल का जवाब इनसे नहीं मिल सका।
. नोडल अधिकारी का पत्र मेरे संज्ञान में है। इसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा। ताकि मरीजों का उपचार अधिक समय तक प्रभावित न रह सके। - प्रो. अंजुम परवेज, प्राचार्य, जेएन मेडिकल कॉलेज
दवा अटकी तो क्या होगा?
. थैलेसीमिया : मरीजों के उपचार में नियमित रक्त चढ़ाने और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है। उपचार की निरंतरता प्रभावित होने पर मरीज की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
. हीमोफीलिया : रक्तस्राव रोकने के लिए निर्धारित उपचार समय पर मिलना जरूरी होता है। इलाज में देरी होने पर रक्तस्राव की स्थिति गंभीर हो सकती है।