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हंगामे के बीच 3.76 अरब का बजट पारित

Fri, 31 Mar 2017 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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मीट लाइसेंस फीस के मुद्दे पर सदन में इस तरह होती रही नोकझोंक। - फोटो : Amar Ujala
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भारी हंगामे और नोकझोंक के बीच नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 3 अरब 76 करोड़ 38 लाख 93 हजार रुपये का बजट पास हो गया। यूं तो यह बोर्ड अधिवेशन कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत किए गए बजट को पारित कराने के लिए था लेकिन इसमें मीट और अवैध मीट कारोबार का मुद्दा जबरदस्त रूप से उठा। एक दिन में बिना किसी जांच और औपचारिकताएं पूरी किए बिना 82 मीट विक्रेताओं को लाइसेंस जारी कर दिए जाने के मुद्दे पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी सदन को संतुष्ट नहीं कर पाए।
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जब अभद्रता करने लगे तो सदन ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। महिला पार्षदों ने सदन में ही टेबलेट कंप्यूटर देने की मांग कर डाली और सदन का बहिष्कार कर दिया। कुछ पार्षदों ने मीट विक्रेताओं की लाइसेंस फीस बढ़ाने की मांग की जिस पर जमकर हंगामा हुआ।

गुरुवार को करीब 11.20 बजे सदन की बैठक शुरू हुई। पहला सवाल पार्षद मो. हामिद ने दागा। उन्होंने पूछा कि नगर निगम का बूचड़खाना बंद पड़ा है। ऐसे में फुटकर मीट विक्रेता अपना माल कहां पर काटें? इस हालत में शादी समारोहों में दिक्कत आ रही है। उन्हें बताया गया कि नगर निगम का बूचड़खाना जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। पार्षद कुलदीप पांडेय ने मीट विक्रेताओं को जारी किए जा रहे लाइसेंसों में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने हाथ में बाइलॉज की प्रति दिखाते हुए कहा कि नियम यह हैं।
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लेकिन एक ही दिन में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने 82 लाइसेंस बिना सत्यापन के जारी कर दिए। इस पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी सदन को संतुष्ट नहीं कर सके। महापौर ने जब उनसे जवाब देने को कहा तो वह बेहद लापरवाह भरे अंदाज में उनसे भी बात करने लगे। इस पर महापौर शकुंतला भारती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। डॉ. कुलदीप के लिए निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।  पार्षद गुनीत मित्तल ने मीट विक्रेताओं के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाने की मांग की तो पार्षद मनीष वूल ने शहर में मीट जोन बनाने की मांग दोहराई। इस दौरान गैर भाजपाई पार्षद मीट के मुद्दे को लेकर बेहद आक्रामक नजर आए और कई बार हंगामे की स्थिति बनी।

यह रही बजट की स्थिति
वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए प्रस्तावित आय- 3 अरब 76 करोड़ 38 लाख 93 हजार 463 रुपये 22 पैसे
पिछला अवशेष- 71 करोड़ 94 लाख 72 हजार 463 रुपये 22 पैसे
वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए प्रस्तावित व्यय- 3 अरब 2 करोड़ 24 लाख 26 हजार 500 रुपये
खर्च के बाद  31.3.18 को अनुमानित अवशेष- 74 करोड़ 14 लाख 66 हजार 963 रुपये 22 पैसे

कान में लीड लगाए थे नगर स्वास्थ्य अधिकारी
नगर स्वास्थय अधिकारी डॉ. कुलदीप कुमार सदन में मोबाइल की लीड कान में लगाकर मशगूल थे। जब महापौर शकुंतला भारती ने मीट लाइसेंस के मुद्दे पर उनसे मुखातिब होने की कोशिश की तो वह लीड के साथ ही बात करने लगे। जब महापौर ने सही तरीके से बात करने की सलाह दी तो वह उखड़ गए और अमर्यादित शैली में आ गए। इस पर सदन विरोध में आ गया। महापौर ने उन्हें बाहर चले जाने को कहा। कुलदीप पांडे ने उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव सदन में रखा जिसे स्वीकार कर लिया गया।

जारी सभी 82 लाइसेंस महापौर ने निरस्त किए
गुुरुवार को नगर निगम बोर्ड अधिवेशन के दौरान नगर स्वास्थ्य अधिकारी की अभद्रता को महापौर शकुंतला भारती ने गंभीरता से लिया है।  उनके द्वारा जारी सभी लाइसेंस निरस्त कर दिए है। साथ ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुलदीप कुमार को डीओ लेटर (अर्ध शासकीय पत्र) जारी करते हुए पूरे प्रकरण से शासन को अवगत कराया है। मेयर ने कहा कि मीट विक्रेताओं को लाइसेंस जारी करने में घोर अनियमितताएं की गई हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी शासन की मंशा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। महापौर शकुंतला भारती ने बताया कि महानगर में 82 लाइसेंस जारी कर दिए गए और उन्हें जानकारी भी नहीं दी गई। जब सदन में उनसे प्रश्न पूछा गया तो उसका जवाब देने के बजाए वह अभद्रता पर उतर आए। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का यह रवैया काफी समय से चल रहा है। लगातार शिकायतें आ रही हैं। गुरुवार को सदन में उन्होंने घोर अनुशासनहीनता का परिचय दिया। इसके चलते उन्हें सदन के बाहर का रास्ता दिखाया गया। लाइसेंस जारी करने में उन्होंने संबंधित निरीक्षकों की रिपोर्ट भी नहीं ली। इससे स्पष्ट है कि उनकी नीयत ठीक नहीं है। एक दिन में जारी किए गए सभी 82 लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। उनके कार्यकाल में जारी सभी लाइसेंस की जांच होगी।
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