पासपोर्ट कार्यालय में एक युवक शुक्रवार को फर्जी अंकपत्र के साथ पासपोर्ट बनवाने पहुंच गया। पासपोर्ट इंचार्ज ने दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान मामला पकड़ लिया। युवक के दस्तावेज कब्जे में लेकर मामले को जांच के लिए गाजियाबाद पासपोर्ट कार्यालय को भेज दिया है।
बन्नादेवी थाना क्षेत्र के मो. ताजीम खान पुत्र हाशिम अली शुक्रवार को प्रधान डाकघर कार्यालय स्थित पासपोर्ट कार्यालय पर आवेदन के अनुसार मिली सत्यापन की तारीख पर दस्तावेजों का सत्यापन कराने पहुंचा। पासपोर्ट इंचार्ज जेडी सिंह ने मो. ताजीम के दस्तावेजों का सत्यापन किया तो उन्हें हाईस्कूल और इंटर के अंकपत्रों पर कालेज की मोहर और प्रिंसिपल के हस्ताक्षर न होने पर शंका हुई।
उन्होंने यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर अंक पत्रों पर अंकित अनुक्रमांक देखा तो वेबसाइट पर उक्त अनुक्रमांक पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर अंकपत्र जारी होने की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने युवक को बैठा लिया। उसके दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है। जेडी सिंह केे अनुसार मामले को जांच के लिए गाजियाबाद कार्यालय भेज दिया गया है। वहां से जांच पूरी होने के बाद भी इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। युवक को पूछताछ के बाद छोड़ दिया है।
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सऊदी अरब जाना था मो. ताजीम को
मो. ताजीम ने पूछताछ में बताया कि उसे जीजा के साथ सऊदी अरब में काम करने जाना है। साथ ही उसने बताया कि उसकी मार्कशीट फर्जी नहीं है। गलती से वह कालेज से मार्कशीट लेते समय उसे अटैच कराना भूल गया था।
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दस माह में आठवां फर्जी मामला
पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेना का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व में भी एलआईयू और पुलिस सत्यापन में सात फर्जी मामले पकड़े जा चुके हैं। इस खेल के पीछे पूरा रैकेट शहर में सक्रिय हो चुका है। इसके बाद भी खुफिया पुलिस की निगाहें उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
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संसाधनों की कमी से जूझ रहा कार्यालय
सांसद सतीश गौतम का ड्रीम प्रोजेक्ट पासपोर्ट कार्यालय संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। कार्यालय पर आए दिन आवेदक कर्मचारियों से अभद्रता कर देते हैं। इसके बाद भी वहां पर गार्ड की तैनाती नहीं की जा रही है। वहीं, दो सीएससी के पद होने के बाद भी डाक विभाग की ओर से एक ही कर्मचारी उपलब्ध कराया गया है। इसके कारण आवेदकों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। सर्वर फेल होने की समस्या से आए दिन कर्मचारी और आवेदक जूझ रहे हैं।