पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने विशेष रणनीति तैयार की है। इसके तहत ग्राम स्तर पर निगरानी कराने की तैयारी है। निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव, सफाई कर्मी एवं रोजगार सेवक को दी गई है। डीएम ने सभी बीडीओ और एडीओ को निर्देश दिए हैं कि वे निगरानी समितियों का गठन कराकर चौकसी बढ़ाएं। आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर जुर्माना वसूला जाए।
पराली जलाने से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय एवं एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में तमाम जागरूकता कार्यक्रम कारगर साबित नहीं हुए हैं। कृषि विभाग की टीमों द्वारा की गई तमाम कार्रवाई और जुर्माना आरोपित करने के बावजूद पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
बताते चलें कृषि विभाग की टीमों ने पराली जलाने के मामले में 43 किसानों के खिलाफ 22 एफआईआर दर्ज कराई हैं। 8 किसानों की गिरफ्तारी हुई है। 97500 रुपया जुर्माना अधिरोपित कर 32500 रुपया जुर्माना जमा कराया है। इसके बावजूद घटनाएं न रुकती देख ग्राम पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय कर दी हैं। डीएम के हवाले से एडीपीआरओ मोहम्मद राशिद ने सभी बीडीओ व एडीओ को पत्र जारी कर ग्राम पंचायत सचिव, सफाईकर्मी व रोजगार सेवक की टीम बनाकर उनकी जिम्मेदारी तय करने को कहा है। स्पष्ट कहा है कि कंबाइन हार्वेस्टर में सुपर एसएमएस लगाए बिना या फसल अवशेष प्रबंधन के अन्य यंत्रों का उपयोग किए बिना कटाई प्रतिबंधित है। ऐसा करने वालों की मशीन सील कर दी जाए और मशीन मालिक पर प्रदूषण फैलाने में सहयोग करने के मामले में विधिक कार्रवाई की जाए। सभी टीमें पराली को एकत्र कर निकटवर्ती गोशाला में पहुंचाने का काम भी करें।
पराली जलाने के मामले में तीन किसानों के खिलाफ मुकदमा
प्रशासन और कृषि विभाग के कड़े रुख और लगातार चेकिंग के बावजूद पराली जलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। बृहस्पतिवार रात हुई चेकिंग के दौरान तीन और किसान पराली जलाते हुए पकड़े गए। तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उप कृषि निदेशक अनिल कुमार ने बताया कि पराली जलाने के मामले में गांव कसेरू चंडौस गभाना निवासी देवी राम, गांव कांडली बांगर टप्पल खैर निवासी मोहित भाटी व गांव मुन्ना जाटान बुलंदशहर, टप्पल खैर निवासी बालमुकुंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।